पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अब महज 10 महीने का समय बाकी है और इस वर्ष के चुनावी मुकाबले के लिए सभी पार्टियां जोर-शोर से तैयारियों में जुटी हुई हैं। इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार से अपनी ‘प्रगति यात्रा’ पर निकलने जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य राज्य में अपनी सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री की यह यात्रा पश्चिम चंपारण से शुरू होगी और इसे लेकर प्रशासनिक तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं।

नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर पहले इस यात्रा को लेकर कुछ संदेह थे, लेकिन जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने स्पष्ट किया है कि यात्रा की शुरुआत मुख्यमंत्री खुद करेंगे और आज से यह यात्रा शुरू हो रही है। मुख्यमंत्री की यह यात्रा बिहार के विभिन्न जगहों को कवर करेगी और इसमें सरकार की प्रगति, विकास कार्यों और राज्य की योजनाओं का प्रचार किया जाएगा।
‘जब बात बिहार की हो, नाम सिर्फ नीतीश कुमार का हो’ के संदेश के साथ जदयू ने राजधानी पटना सहित कई जिलों में पोस्टर लगाए हैं। इन पोस्टरों में नीतीश कुमार का चेहरा प्रमुख रूप से दिखाया गया है, जिसका उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की जनता में मुख्यमंत्री के नेतृत्व को और मजबूत करना है।
यात्रा की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं। लगभग 500 जवान, 150 अधिकारी और मजिस्ट्रेट की टीम को तैनात किया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए संतपुर के कदमहिया गांव में दो हेलीपैड भी बनाए गए हैं। इस गांव का महत्व इस कारण से बढ़ गया है, क्योंकि यह क्षेत्र वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के पास स्थित है और यहां के विकास से इलाके के लोग भी उम्मीदें लगाए बैठे हैं।
वहीं, मुख्यमंत्री की यात्रा पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री की यात्रा पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश कुमार की यात्रा का कोई खास अर्थ नहीं है। उन्होंने इसे एक ‘अनावश्यक यात्रा’ करार दिया और कहा कि नीतीश कुमार लगातार यात्रा पर निकलते रहते हैं, लेकिन इससे राज्य की जनता को कोई खास लाभ नहीं होने वाला है। लालू यादव ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री की यात्रा केवल दिखावा है और राज्य में कोई वास्तविक बदलाव नहीं आएगा।
राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी सीएम की यात्रा पर तंज कसा और इसे ‘अलविदा यात्रा’ कहा। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि नीतीश कुमार की सरकार 2025 के विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की यात्रा से जनता को कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि लोग अब बदलाव चाहते हैं और नीतीश कुमार की सरकार को अलविदा कहने का समय आ गया है।
मुख्यमंत्री की यात्रा और राजनीति
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस यात्रा को ‘मिशन 2025’ के तहत देखा जा रहा है, जिसके माध्यम से वे आगामी विधानसभा चुनाव में जनता के बीच अपनी पार्टी और सरकार की योजनाओं को प्रचारित करने की कोशिश करेंगे। हालांकि, उनकी यात्रा को लेकर राजनीतिक आलोचनाएं भी तेज हो गई हैं। राजद नेताओं के बयान यह स्पष्ट करते हैं कि नीतीश कुमार की यात्रा विपक्ष के लिए चुनावी मुकाबला और विरोध का एक अहम मुद्दा बन सकती है।
वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी यात्रा को लेकर विपक्ष की आलोचनाओं पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है। उनका कहना है कि वे विकास के कार्यों और योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए यात्रा कर रहे हैं और इसका उद्देश्य सिर्फ बिहार के हर हिस्से में सरकार के कामकाज को सही तरीके से प्रस्तुत करना है।
अगले कुछ महीनों में यह यात्रा और राजनीति के बीच का टकराव और भी तीव्र हो सकता है, क्योंकि 2025 के विधानसभा चुनाव में महज कुछ ही महीने बचे हैं और राज्य की राजनीति में बदलाव की उम्मीदें बढ़ रही हैं।

