नई दिल्ली : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अपने जुड़ाव को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उनका पार्टी नेतृत्व ही उन्हें बार-बार गठबंधन बदलने के लिए प्रेरित करता रहा है, लेकिन अब वह स्थायी रूप से NDA में बने रहेंगे।
नीतीश कुमार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को अपना राजनीतिक गुरु मानते हुए कहा, ‘मुझे मुख्यमंत्री बनाने का श्रेय अटल जी को जाता है। मेरा पार्टी नेतृत्व मुझे बार-बार गठबंधन बदलने के लिए प्रेरित करता रहा है, लेकिन अब मैं स्थायी रूप से NDA में रहूंगा’।
उनकी यह टिप्पणी उस समय आई है जब उन्होंने अपने करीबी सहयोगी राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को भाजपा से गठबंधन टूटने का जिम्मेदार ठहराया था। नीतीश कुमार ने कहा था कि ललन सिंह ने उन्हें गलत दिशा में मार्गदर्शन किया, जिससे JD(U) और भाजपा के बीच संबंध बिगड़े।
नीतीश कुमार औऱ बीजेपी का साथ
गौरतलब है कि नीतीश कुमार का भाजपा के साथ गठबंधन 1990 के दशक से चला आ रहा है, जो 2013 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनने के बाद टूट गया था। इसके बाद नीतीश कुमार ने राजद और कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाया, लेकिन 2017 में फिर से भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया। 2022 में उन्होंने फिर से महागठबंधन में शामिल होकर भाजपा से नाता तोड़ा, लेकिन जनवरी 2024 में एक बार फिर NDA में शामिल हो गए और मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
नीतीश कुमार ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि वह भाजपा से गठबंधन में रहते हुए भी अपने धर्मनिरपेक्ष रुख को बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा, ‘हमारा गठबंधन सभी समुदायों के विकास के लिए काम करेगा और किसी भी समुदाय के खिलाफ भेदभाव नहीं होगा’।
नीतीश कुमार बिहार के विकास के लिए प्रतिबद्ध
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नीतीश कुमार का यह कदम आगामी विधानसभा चुनावों में NDA के लिए मजबूती प्रदान कर सकता है। हालांकि, उनके बार-बार गठबंधन बदलने के कारण विपक्षी दलों द्वारा उन्हें अवसरवादी करार दिया जाता है, लेकिन उनके समर्थक उन्हें बिहार के विकास के प्रति प्रतिबद्ध मानते हैं।
नीतीश कुमार का यह बयान भाजपा से उनके गठबंधन को लेकर स्पष्टता प्रदान करता है और आगामी चुनावों में गठबंधन की दिशा को प्रभावित कर सकता है।

