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2025 में IPO तोड़ेगा सारे रिकॉर्ड, आएंगे 2.5 लाख करोड़ राशि

by Rakesh Pandey
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नई दिल्ली : भारत में कंपनियों की ओर से पैसे जुटाने की गति बढ़ रही है। इसके लिए एक मजबूत आधार तैयार हो रहा है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि IPO (Initial Public Offering) के माध्यम से कंपनियों ने इस वर्ष 1.6 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। अगले वर्ष यानि 2025 में इसके अपने ही रिकॉर्ड को तोड़कर 2.5 लाख करोड़ रुपये की राशि जुटाने की संभावना व्यक्त की गई है। इसके लिए कंपनियों की दस्तावेजी प्रक्रिया जारी है। अलग-अलग स्तरों पर मंजूरी मिलने के साथ ही IPO के लिए कंपनियों का रास्ता साफ हो जाएगा।

2.5 लाख करोड़ रुपये जुटाने की संभावना

मजबूत आर्थिक वृद्धि, अनुकूल बाजार व रेगुलरिटी फ्रेमवर्क में सुधार के चलते वर्ष 2024 में कंपनियां 1.6 लाख करोड़ रुपये की राशि आईपीएओ के माध्यम जुटाने में सफल रही हैं। अब आगामी वर्ष 2025 में करीब 75 कंपनियों द्वारा 2.5 लाख करोड़ रुपये की राशि जुटाने का अनुमान आर्थिक जगत के विशेषज्ञ लगा रहे हैं। यदि सभी स्तरों पर कंपनियों द्वारा जमा IPO दस्तावेजों को मंजूरी मिल जाती है, तो ऐसा होना संभव है कि कंपनियां इस वर्ष के अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ दें।

इन कंपनियों ने IPO के जरिए की कमाई

जिन कंपनियों ने आईपीओ की सहायता से वर्ष 2024 में 1.6 लाख करोड़ रुपये की राशि जुटाई है, उनमें कुल 90 कंपनियां शामिल हैं। इनमें से पांच प्रमुख कंपनियां जैसे हुंडई मोटर इंडिया ने 27,870 करोड़ रुपये, स्विगी 11,327 करोड़ रुपये, एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी 10,000 करोड़ रुपये, बजाज हाउसिंग फाइनेंस 6,560 करोड़ रुपये, ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने 6,145 करोड़ रुपये की राशि आईपीओ की सहायता से जुटाई है।

यह कंपनियां IPO लाने की कतार में शामिल

आईपीओ से होने वाले मुनाफे को देखते हुए कई शीर्ष स्तर की कंपनियों ने अब बाजार में अपने आईपीओ लाने के लिए कमर कस ली है। इनमें एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया, पर्सनल गोल्ड लोन देने वाली एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज सहित सूचना प्रौद्योगी (IT) कंपनी हैक्सावेयर टेक्नोलॉजी भी शामिल है।

क्या होता है आईपीओ

आईपीओ, इनिशियल पब्लिक आफरिंग है। इसे हिंदी में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के नाम से भी जाना जाता है। यह कंपनियों द्वारा किया जाने वाला एक ऐसा प्रावधान है, जिसमें प्राइवेट कंपनियां पहली बार अपने शेयर सार्वजनिक रूप से स्टॉक मार्केट में बेचकर पूंजी इकट्ठा करती हैं। इससे निजी कंपनियों को अपने शेयर सार्वजनिक रूप से शेयर मार्केट में बेचकर राशि जुटाने का अवसर मिलता है।

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