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Reserve Bank of India Live Update : RBI का बड़ा एलान : 5 साल बाद रेपो रेट में कटौती होगी!

by Rakesh Pandey
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बिजनेस डेस्क : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रेपो रेट को लेकर आज यानी 7 फरवरी 2025 को बड़ा फैसला लेने जा रहा है। यह फैसला खासतौर पर लोन लेने वाले ग्राहकों और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि केंद्रीय बैंक इस बैठक में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो आपकी लोन की ईएमआई में कमी आ सकती है और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज दरों पर भी इसका असर देखा जा सकता है।

क्या है रेपो रेट में बदलाव की संभावना

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक बुधवार से चल रही है और अब इस बैठक में रेपो रेट, महंगाई और जीडीपी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। वित्तीय विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस बैठक के बाद RBI 5 साल बाद रेपो रेट में कटौती का एलान कर सकता है। अगर रेपो रेट में कटौती की जाती है, तो यह केंद्रीय बैंक की तरफ से महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, जो देश की आर्थिक स्थिति और लोगों की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करेगा।

कितनी हो सकती है रेपो रेट में कटौती

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक मिडिल क्लास को राहत देने के उद्देश्य से रेपो रेट में 25 से 50 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती कर सकता है। इसका मतलब यह है कि अगर रेपो रेट में 0.25% से 0.5% तक की कटौती होती है, तो रेपो रेट लिंक्ड लोन (RLLR) के ब्याज दर में भी लगभग उतनी ही कमी होगी। इसका सीधा असर लोन धारकों की ईएमआई पर पड़ेगा और मिडिल क्लास को कम ईएमआई का भुगतान करना पड़ेगा, जो एक राहत का संकेत हो सकता है।


यह कदम बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लिया जा सकता है। इस कदम से बैंकों को अधिक तरलता मिलेगी, जिससे वे ज्यादा लोन दे सकेंगे और इससे देश की आर्थिक गति को भी बल मिलेगा।

RBI क्यों ले सकता है रेपो रेट में कटौती का फैसला

RBI का मुख्य उद्देश्य महंगाई पर काबू पाना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। पिछले कुछ महीनों में रिटेल इन्फ्लेशन (खुदरा महंगाई) रिजर्व बैंक की तय सीमा 6 प्रतिशत के भीतर रही है, जो एक सकारात्मक संकेत है। इस स्थिति को देखते हुए RBI विकास को बढ़ावा देने और कम खपत से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए रेपो रेट में कटौती का फैसला कर सकता है।

RBI हर दो महीने में MPC बैठक आयोजित करता है, जिसमें छह सदस्यीय कमेटी महंगाई, विकास दर, और ब्याज दरों से संबंधित मुद्दों पर विचार करती है। इस बैठक के दौरान अगर महंगाई नियंत्रण में रहती है, तो केंद्रीय बैंक के पास रेपो रेट में कटौती का विकल्प खुला रहता है, जिससे आर्थिक गति में तेजी लाने में मदद मिल सकती है।

संजय मल्होत्रा का पहला निर्णय

RBI के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं और यह उनकी पहली मौद्रिक नीति समिति बैठक है। उनकी अध्यक्षता में लिए गए फैसले भारतीय अर्थव्यवस्था और सामान्य जनता पर गहरा असर डाल सकते हैं। संजय मल्होत्रा ने हाल ही में गवर्नर का पद संभाला है और यह बैठक उनके कार्यकाल की पहली महत्वपूर्ण चुनौती हो सकती है।

पिछली बार कब हुआ था रेपो रेट में बदलाव

RBI ने पिछली बार मई 2020 में रेपो रेट में कटौती की थी, जब कोविड-19 महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया था। उस समय कोविड के कारण देश में आर्थिक मंदी और संकट का सामना करना पड़ रहा था, इसलिए RBI ने अपनी ब्याज दरों में कटौती की थी। इसके बाद, धीरे-धीरे रेपो रेट को बढ़ाकर 6.5% कर दिया गया था और फरवरी 2023 में फिर से इसे 6.5% पर स्थिर रखा गया था। पिछले 5 वर्षों से रेपो रेट में कोई और कटौती नहीं की गई थी और अब यह पहली बार हो सकता है, जब RBI इस दर में बदलाव करता है।

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