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UP की इस गौशाला में गोबर से बनाया गुलाल; खूबियों से है भरपूर, PM मोदी और CM योगी को भेजने की तैयारी

यह पहल नगर निगम के नगरायुक्त संजय चौहान की देखरेख में की गई है। उनका दावा है कि कान्हा उपवन गौशाला प्रदेश की पहली गौशाला है, जहाँ गोबर से गुलाल बनाने का यह अनोखा प्रयोग किया गया है।

by Anurag Ranjan
UP की इस गौशाला में गोबर से बनाया गुलाल; खूबियों से है भरपूर, PM मोदी और CM योगी को भेजने की तैयारी
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सहारनपुर : होली के इस मौसम में एक अनूठी पहल सामने आई है। कान्हा उपवन गौशाला ने गोबर से गुलाल तैयार किया है, जो न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि त्वचा के लिए भी पूरी तरह से सुरक्षित है। यह गुलाल सिंथेटिक रंगों के मुकाबले कहीं अधिक प्राकृतिक और इको-फ्रेंडली है। इस रंग का निर्माण नगर निगम के सहयोग से हुआ है, और इसे पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ, और उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री एके शर्मा को भेजने की तैयारी है।

यह पहल नगर निगम के नगरायुक्त संजय चौहान की देखरेख में की गई है। उनका दावा है कि कान्हा उपवन गौशाला प्रदेश की पहली गौशाला है, जहाँ गोबर से गुलाल बनाने का यह अनोखा प्रयोग किया गया है। इस गुलाल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह से प्राकृतिक और बिना किसी रसायन के बनाया गया है, जिससे न केवल पर्यावरण की सुरक्षा होती है, बल्कि यह त्वचा के लिए भी सुरक्षित है।

गोबर से गुलाल बनाने की प्रक्रिया

गौशाला में तैयार किए गए इस गुलाल में गोबर के पाउडर, आरारोट, इत्र, चुकंदर, हल्दी, पालक और फलों के रंगों का उपयोग किया जाता है। इस गुलाल को बनाने में किसी भी प्रकार के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया है, जो आमतौर पर बाजार में बिकने वाले सिंथेटिक रंगों में पाया जाता है। यह गुलाल चार रंगों में उपलब्ध होगा – पिंक, हरा, पीला और नीला।

गौशाला के वरिष्ठ प्रभारी और मुख्य अभियंता निर्माण बीके सिंह ने बताया कि यह गुलाल त्वचा के लिए अत्यधिक सुरक्षित है। इसे इस्तेमाल करने के बाद किसी भी तरह की त्वचा संबंधित समस्या, जैसे कि खुजली या एलर्जी, नहीं होगी। साथ ही, इसका उपयोग करने से होली खेलने के दौरान होने वाले नुकसान को भी रोका जा सकेगा, जो आमतौर पर सिंथेटिक रंगों से होता है।

स्किन के लिए सुरक्षित, पर्यावरण के लिए बेहतरीन

गौशाला के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा ने बताया कि इस गुलाल का उपयोग न केवल होली के दौरान किया जा सकता है, बल्कि यह स्किन संबंधित समस्याओं जैसे कि एक्जिमा और सोरायसिस के प्राकृतिक उपचार में भी मददगार हो सकता है। पंचगव्य का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में होता आया है, और गोबर इस उपचार का अहम हिस्सा है।

इस तरह से तैयार किया गया गुलाल न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी बेहद फायदेमंद है। यह पूरी तरह से इको-फ्रेंडली है और किसी भी प्रकार के रसायन या हानिकारक तत्वों से मुक्त है।

विपणन और उपलब्धता

कान्हा उपवन गौशाला की ओर से निर्मित यह प्राकृतिक गुलाल अब नगर निगम द्वारा स्टॉल पर उपलब्ध कराया जाएगा, साथ ही इसे बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बेचा जाएगा। इस गुलाल को 100 ग्राम, 250 ग्राम और 500 ग्राम के पैकेट्स में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।

नगर निगम का दावा है कि इस प्रयोग को लेकर उन्होंने जो कदम उठाया है, वह न केवल पर्यावरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह समाज के लिए एक सकारात्मक बदलाव का भी प्रतीक है।

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