चंडीगढ़ : अकाल तख्त के पूर्व कार्यकारी जत्थेदार, ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अकाल तख्त और तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदारों की बर्खास्तगी की कड़ी आलोचना की और इसे सिख समुदाय के लिए एक ‘काला दिन’ करार दिया। उनका कहना है कि इस फैसले ने सिख समुदाय की धार्मिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाई है।
सिख समुदाय का गुस्सा और राजनीतिक प्रतिक्रिया
ज्ञानी हरप्रीत सिंह के बयान का समर्थन करते हुए कई सिख नेताओं ने इस फैसले को गलत बताया और आलोचना की। उनका मानना है कि यह निर्णय सिख पंथ की एकता को नुकसान पहुँचाने वाला है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) ने शुक्रवार को ज्ञानी रघबीर सिंह को अकाल तख्त के जत्थेदार पद से हटा दिया। एसजीपीसी के अनुसार, ज्ञानी रघबीर सिंह के नेतृत्व में पंथ की दिशा और कार्यप्रणाली में कमियां सामने आईं, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया। एसजीपीसी ने कुलदीप सिंह गडगज को अकाल तख्त का कार्यवाहक जत्थेदार और तख्त केसगढ़ साहिब का जत्थेदार नियुक्त किया है। ज्ञानी रघबीर सिंह स्वर्ण मंदिर के मुख्य ग्रंथी का कार्यभार संभालते रहेंगे।
ज्ञानी हरप्रीत सिंह का विरोध और सिख समुदाय का समर्थन
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “आज का दिन सिख समुदाय के लिए काला दिन है।” उनका कहना है कि इस निर्णय ने ना केवल सिख धर्म की आस्था को चोट पहुँचाई है, बल्कि सिख समाज में भी असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है। कई राजनीतिक और धार्मिक नेताओं ने इस बर्खास्तगी को अनुचित करार दिया और इसे पंथ की एकता के खिलाफ कदम बताया।

