लखनऊ : उत्तर प्रदेश में देश का पहला टेक्सटाइल मशीन पार्क स्थापित किया जाएगा, जो कानपुर के पास 875 एकड़ जमीन पर होगा। इस पार्क का उद्देश्य देश में टेक्सटाइल से जुड़ी मशीनों का निर्माण करना है, जिन्हें अब तक चीन, वियतनाम, दक्षिण कोरिया, ताइवान और यूरोप जैसे देशों से आयात किया जाता है। इस आयात पर हर साल 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं, जो अगले पांच वर्षों में बढ़कर 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकते हैं।
यह पार्क पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर विकसित किया जाएगा और इसके निर्माण से न केवल मशीनों का आयात कम होगा बल्कि यूपी में तकनीकी विशेषज्ञों के लिए भी रोजगार के अवसर खुलेंगे। इस पार्क से 30 हजार करोड़ रुपये का निर्यात होने का अनुमान है। इस परियोजना के लिए 35 बड़ी कंपनियों से बातचीत की जा चुकी है, जो इस पार्क में निवेश करने के इच्छुक हैं। पार्क में 200 से ज्यादा बड़ी और मध्यम इकाइयां स्थापित होंगी, और इससे करीब 1.5 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।
मशीनों का निर्माण यूपी में होगा
टेक्सटाइल सेक्टर में भारत तेजी से विकास कर रहा है और उत्तर प्रदेश इस सेक्टर में अग्रणी बनना चाहता है। अभी तक टेक्सटाइल से जुड़ी विभिन्न मशीनें, जैसे सर्कुलर निटिंग मशीन, फ्लैट निटिंग मशीन, डाइविंग मशीन, प्रिटिंग मशीन, सिविंग मशीन, पेशेंट गाउन मशीन और तकनीकी टेक्सटाइल मशीनें, विदेशों से आयात की जाती हैं। लेकिन अब यूपी में इन मशीनों का निर्माण किया जाएगा। इससे न केवल मशीनों की लागत 40 फीसदी तक कम होगी, बल्कि रिपेयरिंग के लिए कुशल तकनीकी विशेषज्ञ भी यहीं तैयार किए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश के एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने बताया कि इस पार्क के निर्माण से न सिर्फ मशीनों की लागत कम होगी, बल्कि मशीनों की मरम्मत के लिए आवश्यक विशेषज्ञ भी यहीं मिलेंगे, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
यूपी में बढ़ रही है टेक्सटाइल सेक्टर की ग्रोथ
भारत में टेक्सटाइल सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, और उत्तर प्रदेश भी इस क्षेत्र में अपना स्थान मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रहा है। लखनऊ के पास पीएम मित्र पार्क सहित प्रदेश के दस जिलों में दस नए टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाएंगे, जो राज्य को टेक्सटाइल उद्योग में अग्रणी बनाएंगे।
वर्ष 2030 तक वस्त्र बाजार के 350 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, और इसके लिए लगभग चार लाख करोड़ रुपये की मशीनों की आवश्यकता होगी। इन मशीनों की मांग अगले पांच सालों में 10 गुना बढ़ने की संभावना है।
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