रांची : झारखंड के बहुचर्चित अलकतरा घोटाले में 28 साल बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बिहार के पूर्व मंत्री इलियास हुसैन सहित पांच आरोपितों को तीन-तीन साल की सजा और 15-15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

सीबीआई की विशेष न्यायाधीश पीके शर्मा की अदालत ने इस मामले में इलियास हुसैन, शहाबुद्दीन बेग, पवन कुमार अग्रवाल, अशोक कुमार अग्रवाल और विनय कुमार सिन्हा को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। वहीं, मामले में ट्रायल फेस कर रहे सात अन्य आरोपितों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। ये सात आरोपित केदार पासवान, गणपति रामनाथ, शीतल प्रसाद माथुर, तरुण कुमार गांगुली, रंजन प्रधान, शोभा सिन्हा और महेश चंद्र अग्रवाल थे।
अदालत ने इस मामले में 22 मार्च को दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद फैसले की तारीख तय की थी। 1994 में हुआ यह घोटाला 1997 में सामने आया, जब सीबीआई ने मंत्री और अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।
क्या था अलकतरा घोटाला?
यह मामला हजारीबाग जिले के रोड निर्माण से जुड़ा हुआ था। इस घोटाले में कुल 27.70 लाख रुपये की धांधली की गई थी। हजारीबाग को 510 मीट्रिक टन अलकतरा सप्लाई करने का अनुबंध था, लेकिन इसे सप्लाई नहीं किया गया। इसके बजाय कागजों में इसे दिखाया गया और पवन करियर नामक कंपनी से अलकतरा सप्लाई के फर्जी पेपर बनाए गए थे।
इस घोटाले ने हजारीबाग के रोड निर्माण के लिए आवंटित अलकतरा की सप्लाई में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बात उजागर की थी, जिसके कारण सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ था।
न्यायिक कार्रवाई और सजा
सीबीआई ने इस मामले में कठोर कार्रवाई की और अदालत ने पूर्व मंत्री सहित अन्य आरोपितों को दोषी ठहराया। इस फैसले के बाद सीबीआई की कार्रवाई की सराहना की जा रही है, क्योंकि 28 वर्षों बाद घोटाले के आरोपियों को सजा मिली है।

