श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में बीजेपी लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा आयोजित एक भव्य पारिवारिक समारोह पार्टी के भीतर ही चर्चा का केंद्र बन गया है। यह आयोजन दुबे की 25वीं शादी की सालगिरह के उपलक्ष्य में किया गया था, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, लेकिन इस आयोजन की भव्यता और उसका समय पहलगाम में हुए आतंकी हमले की पृष्ठभूमि में कई सवाल खड़े कर रहा है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद VIP सुरक्षा पर उठे सवाल
हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इस हमले ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या संवेदनशील इलाकों में निजी वीआईपी आयोजनों के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाए जा रहे हैं। हालांकि गुलमर्ग में हुए कार्यक्रम और पहलगाम हमले के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं बताया गया है, लेकिन दोनों घटनाओं की निकटता ने सुरक्षा एजेंसियों और बीजेपी नेतृत्व के भीतर चिंता बढ़ा दी है।
बीजेपी ने संगठनात्मक चुनावों पर लगाई रोक
इस आतंकी घटना के बाद बीजेपी ने अपने संगठनात्मक चुनावों को अस्थायी रूप से रोक दिया है। सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय केवल रणनीतिक विचार-विमर्श के चलते नहीं लिया गया, बल्कि हमले के बाद बने गंभीर राजनीतिक माहौल के कारण भी संगठन ने यह कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश में होने वाले राज्य स्तरीय अध्यक्ष पद के चुनाव पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन से पहले संपन्न होने थे, लेकिन अब इन सबमें देरी तय मानी जा रही है।
गृह मंत्री अमित शाह ने मानी कश्मीर में सुरक्षा चूक
24 अप्रैल को हुई सर्वदलीय बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहलगाम हमले को लेकर सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक की बात स्वीकार की। उन्होंने विपक्षी नेताओं से कहा, “अगर कुछ भी गलत नहीं हुआ होता, तो हम यहां क्यों बैठे होते?” इस बयान के जरिए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि कहां और कैसे चूक हुई।
विपक्ष ने सुरक्षा और खुफिया तंत्र की समन्वयहीनता पर उठाए सवाल
बैठक के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने केंद्र सरकार से यह पूछा कि हमले के समय घटनास्थल पर सुरक्षा बल क्यों मौजूद नहीं थे। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सुरक्षा प्रोटोकॉल का सही ढंग से पालन हो रहा है।
बायसरण क्षेत्र को समय से पहले खोलने पर उठा विवाद
सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि अनंतनाग जिले के बायसरण क्षेत्र को खोलने से पहले स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा एजेंसियों को सूचित नहीं किया था। यह इलाका पारंपरिक रूप से जून में अमरनाथ यात्रा शुरू होने तक आम नागरिकों के लिए बंद रहता है। ऐसे में क्षेत्र को समय से पहले खोले जाने और समन्वय की कमी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

