New Delhi: पाकिस्तान के साथ सीमा पर बढ़ते तनाव और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले के मद्देनजर, भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) का पुनर्गठन कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय को राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

सरकार ने खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के पूर्व तेजतर्रार प्रमुख आलोक जोशी को NSAB का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। सात सदस्यों वाले इस नवगठित बोर्ड में भारतीय सेना, खुफिया एजेंसियों, विदेश सेवा और पुलिस सेवा के अनुभवी सेवानिवृत्त अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर अपनी विशेषज्ञता प्रदान करेंगे।
इस महत्वपूर्ण बोर्ड में वायुसेना के पूर्व वेस्टर्न एयर कमांडर एयर मार्शल पीएम सिन्हा, थलसेना के पूर्व साउदर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह, और नौसेना के अनुभवी रियर एडमिरल मोंटी खन्ना को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी राजीव रंजन वर्मा और मनमोहन सिंह, तथा भारतीय विदेश सेवा के पूर्व प्रतिष्ठित राजनयिक बी. वेंकटेश वर्मा भी बोर्ड में अपनी सेवाएं देंगे।
पहलगाम का खूनी हमले के बादद से राष्ट्रव्यापी आक्रोश
हाल ही में पहलगाम में हुए बर्बर आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे। इस घटना को पिछले कई वर्षों में सबसे घातक आतंकी हमला माना जा रहा है, जिसके बाद पूरे देश में शोक और गुस्से की लहर दौड़ गई है।
पीएम मोदी की ताबड़तोड़ उच्च स्तरीय बैठकें
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गंभीर स्थिति पर गहन विचार-विमर्श करने के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) और कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स (CCPA) की लगातार दो उच्चस्तरीय बैठकें कीं। CCPA, जिसे अनौपचारिक रूप से ‘सुपर कैबिनेट’ भी कहा जाता है, को 2019 के पुलवामा हमले के बाद फिर से सक्रिय किया गया है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेने में एक प्रमुख निकाय है।
एक अन्य महत्वपूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ विस्तृत चर्चा की। इस दौरान पीएम मोदी ने सुरक्षा बलों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे इस हमले का जवाब देने के लिए पूरी स्वतंत्रता के साथ कार्रवाई करें — चाहे वह तरीका, समय या लक्ष्य चुनने की बात हो। प्रधानमंत्री का यह स्पष्ट संदेश पाकिस्तान और आतंकी समूहों के लिए एक कड़ा संकेत माना जा रहा है।
पाकिस्तान के खिलाफ कठोर कदम की आहट
पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई प्रारंभिक प्रतिरोधात्मक कदम उठाए हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण कदम सिंधु जल संधि की समीक्षा करना शामिल है। यह कदम इस ओर स्पष्ट संकेत करता है कि आने वाले दिनों में भारत और भी सख्त और रणनीतिक फैसले ले सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
गृह मंत्रालय भी सक्रिय, सुरक्षा एजेंसियों को मिले कड़े निर्देश
इसी बीच, गृह सचिव गोविंद मोहन ने भी एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें विभिन्न अर्धसैनिक बलों के प्रमुख और अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने भाग लिया। इस बैठक में देश की आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत करने और आतंकी नेटवर्क पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए।
भारत सरकार द्वारा NSAB का यह पुनर्गठन और प्रधानमंत्री मोदी का सुरक्षा बलों को पूर्ण स्वतंत्रता देना, पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव और हालिया आतंकी हमले के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम माना जा रहा है। यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

