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Mahabodhi Temple Guinness Record : महाबोधि मंदिर में 375 भिक्षुओं ने एक साथ बजाया सिंगिंग बाउल, बिहार का नाम गिनीज बुक में दर्ज

by Rakesh Pandey
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गया : बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर एक बार फिर विश्व इतिहास का हिस्सा बन गया है। 375 बौद्ध भिक्षुओं ने एक साथ सिंगिंग बाउल बजाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान बना लिया है। इस आयोजन ने न सिर्फ बिहार, बल्कि पूरे भारत को गौरवान्वित किया। यह आयोजन बिहार स्टेट स्पोर्ट्स अथॉरिटी के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी उपस्थित रहे और उन्होंने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र स्वीकार किया।

क्या है सिंगिंग बाउल

सिंगिंग बाउल एक घंटी जैसी ध्वनि उत्पन्न करने वाला पारंपरिक वाद्य यंत्र होता है।

इसका उपयोग बौद्ध साधना, ध्यान और कंपन चिकित्सा में किया जाता है।

यह सात धातुओं – तांबा, टिन, जस्ता, लोहा, चांदी, सोना और पारा से बना होता है।

इससे उत्पन्न ध्वनि और कंपन मानसिक शांति, तनाव मुक्ति और ध्यान में सहायक मानी जाती है।

ऐतिहासिक आयोजन की खास बातें

स्थान : महाबोधि मंदिर परिसर, बोधगया

भागीदारी : 375 भिक्षु, जिनमें 5 वर्ष के बच्चे से लेकर 70 वर्ष तक के बुजुर्ग भिक्षु शामिल थे

उद्देश्य : बौद्ध संस्कृति, ध्यान साधना और बोधगया की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच देना

ध्वनि एवं समरसता का प्रदर्शन : सामूहिक रूप से बौद्ध मंत्रों के साथ सिंगिंग बाउल बजाया गया

गिनीज बुक में दर्ज हुआ रिकॉर्ड

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के आधिकारिक निर्णायक ऋषि नाथ ने इस आयोजन की पुष्टि करते हुए कहा कि 375 प्रतिभागियों ने समरसता और स्थिरता के उच्चतम मानकों का पालन किया। यह आयोजन तकनीकी और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से ऐतिहासिक है। यह पहली बार है जब महाबोधि मंदिर, जो एक यूनेस्को द्वारा प्रमाणित वर्ल्ड हेरिटेज साइट है, का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है।

इस ऐतिहासिक अवसर पर कई गणमान्य रहे मौजूद

सीओ रविंद्रन शंकर (बिहार स्टेट स्पोर्ट्स अथॉरिटी)

डॉ. महाश्वेता महारथी (महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति)

भिक्षु चालिंदा, भिक्षु मनोज तथा अन्य वरिष्ठ भिक्षु

डॉ. त्याग राजन (जिला पदाधिकारी, गया) द्वारा सुरक्षा एवं व्यवस्था की निगरानी

सांस्कृतिक धरोहर को मिला वैश्विक सम्मान

यह रिकॉर्ड सिर्फ एक सांगीतिक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह बिहार की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मान्यता दिलाने वाला पल था। बोधगया, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई, वहां से उठा यह कंपन पूरी दुनिया में शांति और समरसता का संदेश लेकर पहुंचा। महाबोधि मंदिर में आयोजित यह भव्य और आध्यात्मिक आयोजन बिहार के लिए गौरव का प्रतीक बन चुका है। सिंगिंग बाउल के माध्यम से की गई सामूहिक प्रस्तुति ने दुनिया को एकता, शांति और ध्यान की शक्ति का अनुभव कराया।

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