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Jharkhand Politics: झारखंड में SIR को लेकर सियासी घमासान, JMM-BJP आमने-सामने

Jharkhand Politics: SIR मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज, चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल.

by Reeta Rai Sagar
Political heat over SIR in Jharkhand as JMM, BJP clash
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Ranchi: झारखंड में SIR (Special Intensive Revision) को लेकर राजनीतिक तापमान चरम पर है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रवक्ता मनोज पांडे ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बिहार में चुनाव आयोग की आड़ लेकर बीजेपी चुनाव जीतने की साजिश रच रही है।

उन्होंने कहा, “जिन कागजातों की मांग की जा रही है, वे तो बीजेपी नेताओं और उनके कार्यकर्ताओं के परिवार वालों के पास भी नहीं होंगे।”

मनोज पांडे ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी न सिर्फ बिहार में, बल्कि पूरे देश में चुनावी धांधली के सहारे जीतने का प्रयास कर रही है। उन्होंने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के चुनाव में भी गड़बड़ी के आंकड़े सार्वजनिक हो चुके हैं, जिससे साबित होता है कि चुनाव में गंभीर अनियमितता हुई थी।

बीजेपी का पलटवार: घुसपैठियों के मुद्दे पर हो रही राजनीति

बीजेपी के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने JMM के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि SIR का मुद्दा उन लोगों पर प्रहार है जो “घुसपैठिए” हैं। उन्होंने कहा, “विरोधी दलों की बौखलाहट इसलिए है, क्योंकि वे वर्षों से इन्हीं घुसपैठियों के वोट से चुनाव जीतते आए हैं।”

प्रतुल शाहदेव का यह भी कहना है कि जैसे ही घुसपैठियों की पहचान की बात आती है, विपक्षी दल राजनीति शुरू कर देते हैं।

कांग्रेस का आरोप: बीजेपी कर रही मतदाता सूची में हेरफेर

कांग्रेस प्रवक्ता किशोर शाहदेव ने भी बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी अपने स्वार्थ के लिए मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण करवा रही है। उन्होंने चुनाव आयोग की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि झारखंड में भी बीजेपी इसी तरह साजिश कर रही है।

उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी संदेह जताते हुए कहा, “ऐसे में चुनाव आयोग की मंशा और नीयत दोनों पर सवाल उठना लाजिमी है।”

क्या है SIR (Special Intensive Revision)?

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक विशेष प्रक्रिया होती है, जिसके तहत मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण किया जाता है। इस प्रक्रिया में पुराने रिकॉर्ड्स, दस्तावेज़ और मतदाता की पात्रता की दोबारा जांच की जाती है। चुनाव आयोग इस प्रक्रिया का इस्तेमाल साफ़-सुथरे और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए करता है।

SIR को लेकर झारखंड में राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो चुकी है। जहां विपक्ष इसे साजिश बता रहा है, वहीं बीजेपी इसे घुसपैठियों की पहचान का जरूरी कदम मान रही है। अब देखना यह है कि चुनाव आयोग इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और झारखंड की सियासत में इसका अगला अध्याय क्या होगा।

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