

Ranchi (Jharkhand) : झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का और उनकी पत्नी मेनन एक्का समेत कुल 10 आरोपियों को छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी) का उल्लंघन कर जमीन की खरीद-बिक्री के मामले में दोषी करार दिया गया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने 15 साल पुराने इस मामले में शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया। दोषी करार दिए गए सभी आरोपियों को शनिवार, 30 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी। अदालत ने दोषी पाए गए सभी 10 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में लेकर बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार भेज दिया है। इस मामले के 11वें आरोपी, राजस्व कर्मचारी गोवर्धन बैठा, को अदालत ने पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?
एनोस एक्का पर मंत्री रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर फर्जी पते पर आदिवासी जमीन खरीदने और बेचने का आरोप था। सीबीआई के अनुसार, तत्कालीन भूमि अभिलेख उप समाहर्ता (एलआरडीसी) कार्तिक कुमार प्रभात ने इसमें उनकी मदद की थी।

सीबीआई ने झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर 4 अगस्त 2010 को एनोस एक्का और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच पूरी होने के बाद, दिसंबर 2012 में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी, जिस पर अदालत ने संज्ञान लिया। 5 नवंबर 2019 को आरोपियों पर आरोप तय किए गए और सीबीआई ने 18 गवाहों को अदालत में पेश किया।

किन जमीनों का हुआ था सौदा?
आरोपों के मुताबिक, एनोस एक्का ने मार्च 2006 से मई 2008 के बीच अपनी पत्नी मेनन एक्का के नाम से कई जगहों पर जमीनें खरीदी थीं:
- हिनू: 22 कट्ठा
- ओरमांझी: 12 एकड़ से अधिक
- रांची के नेवरी: 4 एकड़ से अधिक
- चुटिया के सिरम मौजा स्टेशन रोड: 9 डिसमिल
