

Koderma (Jharkhand) : जिले का सदर अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार किसी अच्छी वजह से नहीं। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और डॉक्टरों की घोर लापरवाही ने एक और जान ले ली है। सर्दी, खांसी और बुखार का इलाज कराने आए एक व्यक्ति, सुरेश मांझी, की इलाज के दौरान ही मौत हो गई, जिसके बाद उनके परिजनों ने जमकर हंगामा किया और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।

डॉक्टरों व नर्सों पर उदासीनता का आरोप
मृतक की पत्नी ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनके पति, जो हरदिया, नवादा (बिहार) के निवासी थे, पिछले 2-3 दिनों से सर्दी, जुकाम और बुखार से पीड़ित थे। शुक्रवार को सुबह 11 बजे वह उन्हें लेकर कोडरमा सदर अस्पताल आईं। यहां मौजूद डॉक्टर ने उनकी स्थिति देखकर उन्हें भर्ती होने की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि भर्ती होने के बाद न तो कोई डॉक्टर और न ही कोई नर्स उनकी सुध लेने आया।

इंजेक्शन लगते ही हुई मरीज की मौत
जब शाम को सुरेश मांझी की हालत बिगड़ने लगी, तो उनकी पत्नी भागकर इमरजेंसी वार्ड में गईं। वहां से एक एएनएम आई और उन्हें इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगाते ही पांच मिनट के भीतर सुरेश मांझी की मौत हो गई। यह देख मृतक के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने तुरंत वहां मौजूद अन्य मरीजों के परिजनों के साथ मिलकर हंगामा शुरू कर दिया। वे उस एएनएम को ढूंढने लगे, लेकिन पता चला कि मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने उसे वहां से भगा दिया था।

स्वास्थ्यकर्मियों व अस्पताल प्रबंधन पर सवाल
परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल के डॉक्टर और नर्स असंवेदनशील हो गए हैं। उनके अनुसार, स्टाफ ने उनसे कहा, “क्या दुनिया में सिर्फ यही अस्पताल है? यहां इलाज नहीं होता है तो दूसरे अस्पताल जाओ।” यह बयान सरकारी स्वास्थ्य सेवा के प्रति उनकी उदासीनता को दर्शाता है। यह कोई पहली घटना नहीं है। सदर अस्पताल से आए दिन लापरवाही की शिकायतें आती रहती हैं, लेकिन कोई भी इस पर ध्यान नहीं देता। एक तरफ, अस्पताल में मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है, तो दूसरी तरफ, सिविल सर्जन और अस्पताल उपाधीक्षक के बीच वित्तीय पावर को लेकर विवाद चल रहा है। इस खींचतान का सीधा असर अस्पताल की व्यवस्था पर पड़ रहा है और आम लोग इसका खामियाजा भुगत रहे हैं।
यह घटना न सिर्फ सुरेश मांझी के परिवार के लिए एक दुखद त्रासदी है, बल्कि यह पूरे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर एक बड़ा सवालिया निशान भी लगाती है। क्या गरीबों को इलाज के नाम पर सिर्फ लापरवाही ही मिलेगी? क्या कोई भी इन लापरवाहियों के लिए जवाबदेह नहीं होगा? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब जनता को जल्द चाहिए।
