RANCHI: रिम्स परिसर में वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण पर प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। झारखंड हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद रिम्स क्षेत्र में बने अवैध अपार्टमेंट और निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई जारी है। मंगलवार सुबह से ही भारी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर तैनात रहे, जबकि बुलडोजर से एक-एक कर अवैध ढांचों को गिराया जा रहा है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
प्रशासन की इस कार्रवाई के दौरान किसी का भी जोर नहीं चला। विरोध की आशंका को देखते हुए पूरे इलाके में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है। अतिक्रमण हटाने का काम चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े। अधिकारियों के अनुसार यह जमीन रिम्स की है और इस पर किसी भी प्रकार का निजी निर्माण पूरी तरह अवैध है।
कागजात के चक्कर में फंस गए
इस कार्रवाई के दौरान कई ऐसे परिवार सामने आए, जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से घर बनाने की बात कही। प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्होंने बिल्डर और दलालों के झांसे में आकर फ्लैट या मकान खरीदे थे। उन्हें बताया गया था कि जमीन वैध है और सभी कागजात पूरे हैं। लेकिन अब अतिक्रमण हटने के बाद उनके सपने चकनाचूर हो गए। कई परिवारों ने प्रशासन से पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था की मांग भी की है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई किसी के खिलाफ व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि न्यायालय के आदेश का पालन है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण करने वालों और उन्हें बेचने वाले बिल्डरों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी रिम्स ने दिया था नोटिस
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में रिम्स की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने सर्वे कर अवैध निर्माणों की पहचान की। नोटिस देने के बाद भी निर्माण नहीं हटाए गए, इसलिए अब बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है। वहीं जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि जमीन या फ्लैट खरीदने से पहले उसके कानूनी दस्तावेजों की पूरी जांच करें और किसी भी दलाल या बिल्डर के बहकावे में न आएं।

