RANCHI: राजधानी में आवारा कुत्तों का आतंक जारी है। वहीं सरकारी हॉस्पिटलों में ये खुले आम घूम रहे है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ये कुत्ते ओपीडी से लेकर इनडोर में घूम रहे है। इसके बावजूद कुत्तों पर रोक लगाने को लेकर प्रबंधन गंभीर नहीं है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या प्रबंधन इन कुत्तों को रोकने के लिए किसी हादसे का इंतजार कर रहा है। बता दें कि एक महीने पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने हॉस्पिटल,कालेज व पब्लिक प्लेस से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। इसके बावजूद कैंपस से इन्हें हटाने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं कैंपस में इनके प्रवेश रोकने को लेकर भी कोई कदम नहीं उठाया गया।
लोगों को सता रहा डर
सदर हॉस्पिटल और रिम्स के ओपीडी से लेकर इनडोर में कुत्ते मरीजों के पास घूम रहे है। जिससे कि हमेशा लोगों को कुत्तों के काटने का डर सताता रहता है। कई बार ये कुत्ते हॉस्पिटल में शोर मचाते है। वहीं झुंड में ये लड़ते भी है। इससे भी इनडोर में इलाज करा रहे मरीजों को खतरा बना रहता है। कई बार तो कुत्ते मरीजों के वार्ड में भी चले जाते है। ऐसे में अगर ये कुत्ते मरीजों पर हमला कर दे तो उन्हें बचाना मुश्किल हो जाएगा। वहीं इलाज करा रहे गंभीर मरीज भाग भी नहीं पाएंगे।

ड्यूटी में तैनात है सिक्योरिटी गार्ड
दोनों ही सरकारी हॉस्पिटलों में सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी में होमगार्ड्स को तैनात किया गया है। तीन शिफ्टों में ड्यूटी में तैनात रहते है। लेकिन ये केवल मरीजों को रोकने का काम करते है। कैंपस में आवारा कुत्ते इनके सामने घूमते है। लेकिन ये आवारा कुत्तों को भगाने में कोई इंटरेस्ट नहीं दिखाते। वहीं कुछ स्टाफ इन कुत्तों को खाना भी खिलाते है। जिससे कि कैंपस में ही डेरा डाले रहते है।
हर दिन डॉग बाइट के 200 केस
राजधानी में कुत्तों का आतंक जारी है। हर दिन ये आवारा कुत्ते लोगों को अपना शिकार बना रहे है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हर दिन केवल सदर हॉस्पिटल में डॉग बाइट के 200 से अधिक मामले आ रहे है। इतनी संख्या में लोग एंटी रेबीज का वैक्सीन लगवा रहे है। वहीं प्राइवेट में वैक्सीन लगवाने का भी आंकड़ा अलग है। हालांकि सरकारी हॉस्पिटलों में एंटी रेबीज की एक डोज इमरजेंसी में देने का निर्देश दिया गया है।
टीएमएच में किया ये इंतजाम
जमशेदपुर स्थित टीएमएच में आवारा जानवरों को रोकने का इंतजाम इंट्री गेट पर ही किया गया है। जहां पर ऐसी व्यवस्था की गई है कि कुत्ते या जानवरों के पहुंचने पर उनका पैर उसमें फंस जाएगा। जिससे कि वे आगे नहीं जा सकेंगे। वहीं हॉस्पिटल जाने वाले लोगों के पैर उसमें नहीं फंसेंगे। इसके अलावा जुबली पार्क में भी जानवरों को रोकने के लिए ऐसा ही इंतजाम किया गया है। जिससे कि आवारा जानवर व कुत्ते कैंपस में प्रवेश ही नहीं कर सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ये आदेश
देशभर में आवारा पशुओं और कुत्तों से जुड़ी बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने कई अहम निर्देश जारी किए थे। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया और तीन सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट व हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए थे। राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को दो सप्ताह के भीतर ऐसे सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेजों तथा अस्पतालों की पहचान करनी थी जहां आवारा पशु और कुत्ते घूमते हैं। इन परिसरों में बाड़ लगाने और रखरखाव के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी निर्देश दिया गया था।
नगर निगम, नगर पालिका और पंचायतों को तीन महीने में कम से कम एक बार निरीक्षण करने को कहा गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पकड़े गए आवारा कुत्तों को उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा। रेलवे स्टेशन, बस डिपो, स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 24 घंटे मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी-रैबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन उपलब्ध कराने को कहा गया था। एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया को चार सप्ताह में SOP जारी करने का आदेश दिया गया था।

