गिरिडीह : झारखंड के गिरिडीह जिले में एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने दो परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया। देवरी थाना क्षेत्र अंतर्गत चतरो के पास जमुआ–चकाई मुख्य मार्ग पर शनिवार देर रात हुए हादसे में दो युवकों की मौत हो गई। हादसा इतना अचानक और भीषण था कि आसपास के लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही दोनों सड़क किनारे लहूलुहान हालत में पड़े मिले।

जमुआ–चकाई मुख्य मार्ग पर हुआ हादसा
यह दुर्घटना देवरी थाना क्षेत्र के चतरो हटिया मोड़ के पास हुई। मृतकों की पहचान कांटीदिघी गांव निवासी मिथिलेश कुमार राय (35) और गादिदिघी गांव के टोला मंझलाडीह निवासी रामकुमार राय (55) के रूप में की गई है। बताया जा रहा है कि मिथिलेश कुमार राय बाइक से कहीं जा रहा था, जबकि रामकुमार राय नामक व्यक्ति पैदल सड़क पार कर रहा था। इसी दौरान किसी अज्ञात वाहन से यह हादसा हो गया।
सड़क किनारे बेहोशी की हालत में पड़े मिले दोनों
स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे के बाद दोनों काफी देर तक सड़क किनारे पड़े रहे। अंधेरा होने और सड़क पर यातायात कम रहने के कारण तुरंत किसी की नजर नहीं पड़ी। कुछ देर बाद घटना की सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और दोनों को गंभीर अवस्था में इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने शुरू की जांच
हादसे की जानकारी मिलते ही देवरी थाना के सब-इंस्पेक्टर रामपुकार सिंह दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से पूछताछ कर दुर्घटना से संबंधित प्रारंभिक जानकारी जुटाई। रविवार को दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए गिरिडीह सदर अस्पताल भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसा किस वाहन से और किन परिस्थितियों में हुआ।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
अचानक हुई इस घटना से दोनों मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया है। गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जमुआ-चकाई मुख्य मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था और रात्रि में गश्त बढ़ाने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर पहले भी कई सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण सड़क और मुख्य मार्गों पर प्रकाश व्यवस्था, स्पीड कंट्रोल और नियमित पुलिस पेट्रोलिंग से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस हादसे से सबक लेकर भविष्य में कितने प्रभावी कदम उठाता है।

