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Hazaribagh: राजनीतिक शिष्टाचार और संवेदनशीलता पर फिर उठे सवाल, नेताओं की सार्वजनिक प्रतिक्रिया बनीं विवाद का कारण

बिहार के सीएम द्वारा एक मुस्लिम महिला के नकाब हटाए जाने के बाद से सामने आए कुछ वीडियो और बयानों के संदर्भ में उठ रहा है सवाल।

by Reeta Rai Sagar
Amba Prasad
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नई दिल्ली/झारखंड: सार्वजनिक जीवन में नेताओं के आचरण और उनकी संवेदनशीलता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक मुस्लिम महिला के नकाब हटाए जाने के बाद से सामने आए कुछ वीडियो और बयानों के संदर्भ में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सत्ता में बैठे प्रतिनिधि महिलाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों को पर्याप्त गंभीरता और सम्मान के साथ ले रहे हैं।

पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने उठाया सवाल

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा एक पोस्ट में झारखंड के हजारीबाग के बड़कागांव से पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने एक पोस्ट साझा कर बीजेपी के मंत्री ओमप्रकाश राजभर पर सवाल खड़े किए है। कुछ घटनाओं की ओर ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि महिलाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर कुछ नेताओं की हँसी असहज करने वाली है।

इन घटनाओं को लेकर राजनीतिक गलियारों में मतभेद स्पष्ट हैं। एक वर्ग का मानना है कि वीडियो क्लिप या क्षणिक प्रतिक्रियाओं को संदर्भ से काटकर देखना उचित नहीं है और कई बार मंचीय परिस्थितियों में गलत संदेश चला जाता है। वहीं, आलोचकों का तर्क है कि जब बात महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और न्याय जैसे विषयों की हो, तब सार्वजनिक मंच पर बैठे जनप्रतिनिधि से संयम और गंभीरता की अपेक्षा की जाती है।

नेताओं का व्यवहार समाज के लिए अहम संकेत

महिला अधिकारों पर काम करने वाले सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसे मामलों में संदेश बहुत अहम होता है। उनका मानना है कि नेताओं का व्यवहार समाज के लिए एक संकेत होता है और छोटी-सी असंवेदनशील प्रतिक्रिया भी पीड़ितों और आम जनता के भरोसे को आहत कर सकती है।

कांग्रेस की पूर्व विधायक ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा….

कांग्रेस की पूर्व विधायक ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि, जब नीतीश कुमार ने एक महिला डॉक्टर का नक़ाब खींचा, तब पीछे खड़े लोग ठहाके लगा रहे थे। उस वक्त भाजपा मंत्री संजय निषाद हँस रहे थे और आज, जब एक पत्रकार ने कुलदीप सिंह सेंगर की ज़मानत का ज़िक्र किया और कहा- “पुलिस रेप पीड़िता को जंतर-मंतर से ले गई”, तो भाजपा मंत्री ओमप्रकाश राजभर हँसने लगे।

यह हँसी नहीं है,यह घिनौनी, संवेदनहीन सोच का खुला प्रदर्शन है। यह हँसी महिलाओं के दर्द, उनके संघर्ष और न्याय की माँग पर किया गया भद्दा मज़ाक है। यही हैं सत्ता में बैठे हमारे नेता। इन्हें देखिए, इन्हें सुनिए और सोचिए कि ऐसे हाथों में देश की बागडोर होने पर महिलाओं का भविष्य कितना असुरक्षित, डरावना और अनिश्चित है।

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