Jamshedpur : जमशेदपुर के बारीडीह 10 नंबर ज़ोन में वरदान कालोनी में आदिवासी भूमिज समाज की जमीन को लेकर शनिवार को बड़ा हंगामा हुआ है। मामला खाता नंबर 17, प्लॉट नंबर 4097 से जुड़ा है, जिसके मूल खाता धारक व मालिक स्वर्गीय मोहन भूमिज और भागवत भूमिज बताए जा रहे हैं। इस जमीन पर कुछ लोगों ने निर्माण शुरू किया तो बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे समाज के लोगों ने बवाल कर दिया। भूमिज समाज के लोगों का कहना है कि इस आदिवासी जमीन सीएनटी एक्ट के तहत बिक्री नहीं हो सकती।

तो फिर पंजी टू में जमीन के कथित फर्जी खरीदारों के नाम कैसे चढ़ गए। कहा जा रहा है कि पंजी टू में नाम तब चढ़ाए गए जब, सीओ ने इसके म्यूटेशन के आवेदन को रिजेक्ट कर दिया था। भूमिज समाज की मांग है कि इस जमीन पर उनके वास्तविक भूमिज मालिकों को दखल दिहानी दिलाई जाए।
बताया जा रहा है कि शनिवार को कई लोग इस जमीन पर निर्माण कार्य काराने लगे तो भूमिज समाज के लोग वहां पहुंच गए और फौरन निर्माण कार्य रुकवा दिया। प्रदर्शनकारियों ने सीएनटी एक्ट के तहत जमीन को आदिवासी भूमि बताते हुए स्थल पर बोर्ड भी लगा दिया है।
भूमिज समाज के अनुसार यह दो एकड़ 42 डिस्मिल का प्लाट था। अब वर्तमान में कुछ दिन पहले अमीन ने इसकी मापी की है। इस मापी में यह जमीन महज 68 डिस्मिल बची है। बाकी जमीन को लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। इसके बाद अवैध कब्जे की जमीन खाली कराने के लिए एलआरडीसी के यहां केस दर्ज कराया गया है।
समाज के लोगों का आरोप है कि यह केस दर्ज होने और पेसा कानून लागू होने की वजह से ही जमीन की अवैध तरीके से खरीद-फरोख्त करने वालों में हड़कंप है और वह आनन-फानन निर्माण कार्य में जुए गए हैं। कहा जा रहा है कि साल 2016 में इस जमीन को लेकर 28 लोगों ने म्यूटेशन का आवेदन दिया था। भूमिज समाज के अमर सिंह सरदार का कहना है कि सीएम हेमंत सोरेन इस मामले का संज्ञान लें और जांच कराएं।
भूमिज समाज का कहना है कि इस जमीन पर अवैध कब्जे का काम साल 2016 में तब शुरू हुआ था जब झारखंड में भाजपा की सरकार थी। समाज के लोगों का कहना है कि दुष्यंत पाल इस जमीन को लोगों के हाथों बेच रहे हैं।
वहीं, जमीन के वर्तमान दावेदार दुष्यंत पाल का कहना है कि वह इस जमीन के वैध मालिक हैं। उनके पास जमीन से जुड़े सभी वैध कागजात मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि अगर आदिवासी भूमिज समाज इस मामले को लेकर हाई कोर्ट जाना चाहता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। वे सभी दस्तावेज न्यायालय के समक्ष रखने को तैयार हैं।
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