चाईबासा : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले और ओडिशा सीमा से सटे इलाकों में दंतैल पागल हाथी का आतंक पिछले 12 दिनों के बाद भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। वन विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद बीते दो दिनों से हाथी की सटीक लोकेशन का पता नहीं चल पाया है, जिससे ग्रामीणों की चिंता और दहशत और बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, इस दंतैल हाथी ने पिछले 12 दिनों में अब तक 22 लोगों की जान ले ली है, जबकि आधा दर्जन से अधिक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हाथी ने दर्जनों घरों को तोड़ डाला है और लाखों रुपये की फसल को नुकसान पहुंचाया है। जंगल और उसके आसपास जीवन यापन करने वाले गरीब आदिवासी परिवारों के लिए यह हाथी किसी आफत से कम नहीं बन गया है।
हाथी पर काबू पाने के लिए गुजरात, असम, ओडिशा और झारखंड की संयुक्त एक्सपर्ट वन विभाग टीम, विशेषज्ञों और ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है, लेकिन सोमवार तक भी हाथी की सटीक लोकेशन ट्रैक नहीं हो सकी। वन विभाग के मुताबिक, बीते शुक्रवार को मझगांव प्रखंड के बेनीसागर इलाके में दंतैल हाथी कई घंटों तक एक ही स्थान पर मौजूद रहा, इसके बावजूद उसे काबू में नहीं लिया जा सका। इसे लेकर वन विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
वन विभाग का कहना है कि घने जंगल और जोखिम भरे हालात के कारण ऑपरेशन में बाधाएं आ रही हैं। इसके बाद हाथी ओडिशा के काजू बगान क्षेत्र की ओर चला गया था, जहां उसने कोई नुकसान नहीं किया। वहां से उसे फिर झारखंड की ओर खदेड़ दिया गया, लेकिन इसके बाद से पिछले दो दिनों से हाथी की कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है।
हालांकि बीते दो दिनों में हाथी के हमले से किसी की मौत नहीं हुई है, लेकिन लगातार बने खतरे से पश्चिमी सिंहभूम जिले के ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है। लोग रात में अपने घरों में अकेले सोने से डर रहे हैं। कई गांवों में महिलाएं और बच्चे सुरक्षित पक्के मकानों में शरण ले रहे हैं, जबकि पुरुष मशाल, पटाखे और टॉर्च लेकर पूरी रात पहरेदारी करने को मजबूर हैं।
कुल मिलाकर दंतैल हाथी के आतंक ने पूरे इलाके की रफ्तार थाम दी है और ग्रामीण भय के साये में जीने को विवश हैं।
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