रांची : झारखंड में संगठित अपराध का कल्चर ही बदल गया है। अब अपराधी घटना को अंजाम देकर सिर्फ फरार नहीं हो रहे, बल्कि इसके तुरंत बाद खुलेआम जिम्मेदारी ले रहे हैं। वे यह जिम्मेदारी किसी बयान, पर्चे या फोन कॉल के माध्यम से नहीं, बल्कि सीधे सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर ले रहे हैं। इन दिनों सोशल मीडिया का अपराधियों में ट्रेंड बना हुआ है। फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म अपराधियों के लिए अपनी ताकत दिखाने और लोगों के बीच दहशत फैलाने का जरिया बन चुके हैं। इन सबके बीच एंटी टरेरिस्ट स्क्वाड (एटीएस) अपराधियों की गतिविधियों पर पैनी नजर लगाए हुए है। कार्रवाई से साफ है कि एटीएस ने जुर्म की कड़ी तोड़ने के लिए सारी ताकत लगा दी है।
मालूम हो कि हाल के महीनों में राज्य के कई जिलों में हुई फायरिंग और आपराधिक घटनाओं के बाद जिस तरह अपराधियों ने सोशल मीडिया पर सामने आकर जिम्मेदारी ली है, उसने पुलिस-प्रशासन को चौंका दिया है। घटना की जिम्मेदारी लेने से पुलिस को अपराधियों तक पहुंचने में मशक्कत नहीं करनी पड़ रही।
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पुलिस सीधे गिरोह के अपराधियों को गिरफ्तार कर ले रही है। हाल में ही पुलिस ने कई अपराधियों को गिरफ्तार भी किया है। एटीएस एसपी ऋषभ झा ने फोटोन संवाददाता से विशेष बातचीत में कहा कि अपराधियों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कड़ी नजर रखी जा रही है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लैटफॉर्म पर एक्टिव आईडी को कंपाइल कर डीप एनालिसिस की जा रही है। कई मामलों का खुलासा भी हुआ है, कई अपराधियों को जेल भी भेजा गया है। बहुत जल्द अपराधियों के पूरे सोशल नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया जाएगा।
हाल में इन घटनाओं को अंजाम देने के बाद सामने आया गिरोह
झारखंड में हुईं घटनाओं पर नजर डालें तो साफ है कि आपराधिक गिरोहों ने जिम्मेदारी लेने को अपनी नई पहचान बना ली है। 9 जनवरी को चतरा जिले में राजधर साइडिंग के पास हुई गोलीबारी की घटना के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर राहुल सिंह गिरोह ने इसकी जिम्मेदारी ली। इसी तरह 6 जनवरी को रामगढ़ जिले के कुजू में कोयला व्यवसायी डब्बू सिंह के आवास पर हुई गोलीबारी के बाद राहुल दुबे गैंग ने पर्चा छोड़कर और सोशल मीडिया के माध्यम से घटना को अंजाम देने का दावा किया।
इसी तरह 3 जनवरी को रामगढ़ में ओवर ब्रिज निर्माण कार्य के आॅफिस में हुई गोलीबारी का जिम्मा भी राहुल सिंह गिरोह ने लिया। इससे पहले 30 दिसंबर 2025 को हजारीबाग के उरीमारी क्षेत्र में हुई फायरिंग की जिम्मेदारी राहुल दुबे गैंग ने ली थी। 24 दिसंबर 2025 को सयाल उरीमारी गोलीकांड के बाद भी सोशल मीडिया पर इसी गिरोह ने अपना नाम सामने रखा।
कुख्यात अमन साहू ने की थी शुरूआत, एटीएस ने कर दिया साफ
अपराधियों के लिए सोशल मीडिया दहशत फैलाने का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। इस ट्रेंड की शुरूआत कभी कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू ने की थी, जिसे एटीएस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। अमन साहू फेसबुक पर लग्जरियस हथियारों के साथ तस्वीरें पोस्ट करता था। खुलेआम घटनाओं की जिम्मेदारी भी लेता था।
इसी रणनीति के जरिए उसने अपना आपराधिक नेटवर्क मजबूत किया और विरोधियों के साथ-साथ आम लोगों में भी भय पैदा किया। अब अमन साहू के रास्ते पर गैंगस्टर प्रिंस खान, सुजीत सिन्हा, राहुल दुबे उर्फ राहुल सिंह और आकाश रॉय उर्फ मोनू जैसे अपराधी चल रहे हैं। प्रिंस खान वर्तमान में दुबई में बैठकर अपने गुर्गों के जरिए आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिला रहा है। इन सबके के बीच एक नाम तेजी से उभर रहा है- कुबेर सिंह। हालांकि, सूत्र बताते हैं कि कुबेर सिंह कोई और नहीं खुद सुजीत सिन्हा है। पुलिस की जांच में भी इसका खुलासा हो चुका है। ये सभी गिरोह सोशल मीडिया पर खुद को संगठित और ताकतवर दिखाने की कोशिश करते हैं।
वर्चस्व के लिए एक-दूसरे पर भी करा रहे हमला
इन अपराधियों का हमला कराना सिर्फ फिरौती तक ही सीमित नहीं है। ये बगावत में एक-दूसरे पर भी हमला करा रहे हैं। अपनी बादशाहत साबित करने के लिए सुजीत सिन्हा और राहुल सिंह गिरोह के बीच तनातनी है। वर्चस्व जमाने के लिए कई बार एक-दूसरे के घर पर भी हमला करा देते हैं। सोशल मीडिया में भी दोनों गुटों के बीच जंग छिड़ी रहती है। हाल में ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
हाल ही में मधुपुर जेल में बंद मोनू की तस्वीर आई थी सामने
जेल में रहने के बावजूद अभी भी कुख्यात अपराधियों का सोशल मीडिया अकाउंट लगातार एक्टिव रहता है। हाल के दिनों में मधुपुर जेल में बंद आकाश रॉय उर्फ मोनू की तस्वीर सामने आई थी। इसमें वह अपनी पत्नी पम्मी से वीडियो कॉल के माध्यम से बात करते नजर आ रहा था। विरोधी कोयलांचल शांति सेना का भी इस तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट आया था, जिसमें कहा गया था कि आकाश रॉय जेल में खुलेआम मोबाइल का इस्तेमाल कर रहा है।

सलाखों के पीछे से भी एक्टिव है गैंगस्टर नेटवर्क, ‘द फोटोन न्यूज’ उठा चुका है मुद्दा, हुई थी कार्रवाई

अपराधियों का नेटवर्क इतना स्ट्रांग है कि ये जेल के अंदर से भी सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। कहा जाए तो अपराध का समराज्य जेल के अंदर से आॅपरेट किया जा रहा है।

सूचना पर जेल प्रशासन छापेमारी भी करता है, लेकिन हाथ कुछ नहीं आता। सूत्र बतातें हैं कि जेल के अंदर अपराधियों की मजबूत पकड़ है। छापेमारी से पहले उन्हें सूचना मिल जाती है।

जेल के अंदर से मोबाइल चलाने व सोशल मीडिया में एक्टिव रहने के मुद्दे को ह्यद फोटोन न्यूजह्ण पहले भी उठा चुका है। इसके बाद पलामू जेल में छापेमारी भी हुई थी। दोबारा खबर छपने के बाद 9 अक्टूबर 2025 को जेल प्रशासन ने गैंगस्टर सुजीत सिन्हा को पलामू जेल से साहिबगंज जेल में शिफ्ट करने का आदेश जारी कर दिया था।

पुलिस के लिए दोधारी तलवार
जब कोई गिरोह खुद घटना का दावा करता है, तो जांच की दिशा लगभग तय हो जाती है। पुलिस को यह जानने में देर नहीं लगती कि किस गिरोह की गतिविधियां किस इलाके में सक्रिय हैं। सोशल मीडिया पोस्ट से अपराधियों के नेटवर्क, उनके संपर्क और कभी-कभी लोकेशन तक के संकेत मिल जाते हैं। कई मामलों में पोस्ट डालने के बाद ही पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यही कारण है कि पुलिस के लिए यह स्थिति दोधारी तलवार जैसी बन गई है।
लगाम लगाने की जरूरत
पुलिस को तकनीकी निगरानी और साइबर सेल को और मजबूत करने की जरूरत है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय बढ़ाकर ऐसे अकाउंट्स को तुरंत ब्लॉक करना चाहिए, जो अपराध का प्रचार कर रहे हैं। साथ ही, ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई कर यह संदेश देना जरूरी है कि अपराध की जिम्मेदारी लेना भी अपराध ही है।
Jharkhand ATS SP Rishabh Jha : वर्जन

अपराधियों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर एटीएस लगातार नजर बनाए हुए है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लैटफॉर्म पर एक्टिव आईडी को कंपाइल कर डीप एनालिसिस की जा रही है। जांच के दौरान कई मामलों का खुलासा हुआ है, कई अपराधियों को जेल भेजा गया है। अब अपराधियों के सोशल मीडिया हैंडलरों की भी पहचान की जा रही है। उनकी गतिविधियों पर पूरी निगरानी रखी जा रही है। बहुत जल्द अपराधियों के पूरे सोशल नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया जाएगा।
— ऋषभ झा, एसपी, एटीएस।

