रामगढ़ : झारखंड के रामगढ़ जिले से एक चिंताजनक और गंभीर मामला सामने आया है, जहां गोला प्रखंड क्षेत्र के चोपादारू गांव के जंगल और रिहायशी इलाके के समीप एक हाथी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मंगलवार सुबह ग्रामीणों ने जंगल किनारे हाथी का शव देखा, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी है।
हाथी की मौत प्राकृतिक है या इसके पीछे कोई मानवजनित कारण छिपा है, यह फिलहाल सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। वन विभाग ने इस पूरे मामले को गंभीर वन्यजीव अपराध की आशंका के रूप में लिया है।
रिहायशी इलाके के पास मिला शव, वन विभाग अलर्ट
जानकारी के अनुसार, जिस स्थान पर हाथी का शव मिला है, वह क्षेत्र पूरी तरह घना जंगल नहीं बल्कि मानव आबादी से सटा हुआ इलाका है। ऐसे में हाथी का इस स्थान पर आना और उसकी मौत हो जाना कई तरह के संदेह को जन्म दे रहा है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि हाथी की मौत किसी साजिश के तहत हुई है, तो यह वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत गंभीर अपराध माना जाएगा।
डीएफओ का बयान : पोस्टमाॅर्टम से ही होगा खुलासा
रामगढ़ वन प्रमंडल के डीएफओ नीतीश कुमार ने बताया कि हाथी की मौत के कारणों को लेकर फिलहाल कुछ भी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि हाथी की मौत अचानक हुई है और प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध प्रतीत होता है। पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
डीएफओ ने यह भी स्पष्ट किया कि हाथी का पोस्टमाॅर्टम उसी स्थान पर किया जाएगा, जहां उसका शव मिला है। वन्यजीव नियमों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया की जाएगी।
जहरीला पदार्थ खिलाने की आशंका
वन विभाग की प्रारंभिक जांच में यह आशंका भी जताई जा रही है कि हाथी को किसी जहरीले पदार्थ का सेवन कराया गया होगा। जिस स्थान पर हाथी गिरा हुआ मिला, वहां काफी मात्रा में खून पाया गया है। यह स्थिति सामान्य प्राकृतिक मृत्यु से अलग मानी जा रही है, जिससे संदेह और गहरा गया है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि पोस्टमाॅर्टम में जहर या किसी बाहरी चोट के संकेत मिलते हैं, तो यह मामला वन्यजीव तस्करी या मानव-हाथी संघर्ष से भी जुड़ सकता है।
मानव-हाथी संघर्ष की पृष्ठभूमि भी जांच के दायरे में
रामगढ़ और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ वर्षों से मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं। फसलों को नुकसान, गांवों में हाथियों की घुसपैठ और लोगों की असुरक्षा जैसी समस्याओं के कारण कई बार तनाव की स्थिति बन जाती है। ऐसे में वन विभाग इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रहा है कि कहीं हाथी की मौत इसी संघर्ष का परिणाम तो नहीं है।
जांच पूरी होने तक कई सवाल अनुत्तरित
फिलहाल हाथी की मौत को लेकर वन विभाग, पशु चिकित्सा विशेषज्ञ और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से जांच में जुटे हुए हैं। पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि हाथी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश है।

