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Chaibasa : ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ के तहत सारंडा से होगा नक्सलियों का सफाया, महानिदेशक ने नक्सलियों के खात्मे की दी डेडलाइन

सीआरपीएफ के महानिदेशक पहुंचे चाईबासा, अधिकारियों के साथ की मीटिंग

by Vivek Sharma
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चाईबासा : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने झारखंड सहित अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों से नक्सलियों का पूरी तरह सफाया करने की डेडलाइन इस साल मार्च तक दी है। इसे लेकर सोमवार को चाईबासा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक (ऑपरेशन) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह चाईबासा पहुंचे। यहां उन्होंने सारंडा क्षेत्र में चल रहे ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ को लेकर सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अहम समीक्षा बैठक की ।
झारखंड पुलिस और केंद्रीय बलों के अधिकारियों के साथ सारंडा की लड़ाई को मजबूती के साथ जीतने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है। पुलिस का दावा है कि जो समय-सीमा निश्चित की गई है, उसमें, झारखंड से भी नक्सलियों का सफाया कर दिया जाएगा। हालांकि, 2 घंटे तक चली बैठक में पत्रकारों का कोई भी सवाल का जवाब दिए बिना डीजी निकल गए।

केंद्रीय बलों के साथ समन्वय स्थापित कर नक्सल उन्मूलन का लक्ष्य : एसपी

जिले के पुलिस अधीक्षक अमित रेनु ने कहा कि झारखंड पुलिस ने केंद्रीय बलों के साथ समन्वय स्थापित कर नक्सल उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। जिस पर पश्चिमी सिंहभूम जिले में भी रणनीति के तहत काम किया जा रहा है। इसको लेकर आज सीआरपीएफ के महानिदेशक के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। आगे भी ठोस रणनीति के आधार पर मिलकर काम किया जाएगा। सारंडा से नक्सलियों के खात्मे के लिए पुलिस प्रतिबद्ध है।

सारंडा में माओवादियों का गढ़

झारखंड का कोल्हान एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां नक्सलियों का सबसे बड़ा गिरोह डेरा डाले हुए है, इसमें तीन एक-एक करोड़ के इनामी नक्सली कमांडर भी शामिल हैं। कोल्हान में प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा, अनल, असीम मंडल (तीनों एक करोड़ के इनामी), मोछू, अजय महतो, सागेन अंगरिया, अश्विन, पिंटू लोहरा, चंदन लोहरा, अमित हांसदा उर्फ अप्टन, जयकांत, रापा मुंडा अपने दस्ता के सदस्यों के साथ सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में विध्वंसक गतिविधियों के लिए जमा हैं।

महानिदेशक (ऑपरेशन) ने दिए सख्त निर्देश

महानिदेशक (ऑपरेशन) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने बैठक के दौरान नक्सल विरोधी अभियानों को और तेज करने, इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने, जंगल क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन की प्रभावशीलता बढ़ाने, स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच बेहतर समन्वय जैसे अहम बिंदुओं पर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए।

ओडिशा पुलिस भी अलर्ट

सारंडा में झारखंड के नक्सल इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू हुए लगभग 6 महीने हो चुके हैं। हालांकि अभियान सारंडा में पिछले तीन सालों से चल रहा है। सारंडा जंगल की सीमा ओडिशा तक सटी हुई है। यही कारण है कि झारखंड के साथ साथ ओडिशा पुलिस भी बेहद सतर्क हो गई है। वह अपनी सीमा पर लगातार नजर रख रही है ताकि झारखंड से नक्सलियों का मूवमेंट ओडिशा में न हो सके।

ऑपरेशन में इनका रहेगा योगदान

सारंडा फतह के लिए झारखंड आर्म्ड फोर्स (गोरखा बटालियन) की पांच कंपनियों के साथ-साथ झारखंड जगुआर की सभी कंपनियां सारंडा में हैं। इसके अलावा, अभियान की निगरानी के लिए आईपीएस,डीएसपी सहित शामिल हैं। सारंडा में चाईबासा पुलिस, कोबरा, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ और जैप मिलकर अभियान चला रही हैं। सारंडा में 54 कैंप स्थापित कर दिए गए हैं।

मार्च तक माओवाद मुक्त भारत का लक्ष्य

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि इस साल मार्च तक पूरे देश से माओवादियों का खात्मा कर दिया जाएगा। नक्सल प्रभावित राज्यों में एक साथ सघन और निर्णायक अभियान चलाया जा रहा है ।

सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में नक्सलियों पर बड़ा प्रहार

महानिदेशक ऑपरेशन के चाईबासा दौरे से साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में नक्सलियों पर बड़ा प्रहार किया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियां इसे झारखंड में माओवादी नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में निर्णायक मोड़ मान रही हैं।

सारंडा पर विशेष फोकस, तीन साल से चल रहा लुका-छुपी का खेल

करीब तीन सालों से झारखंड पुलिस केंद्रीय बलों के साथ सारंडा के बीहड़ों में पुलिस और नक्सली के बीच लुका-छुपी का खेल चल रहा है। लेकिन हमेशा नक्सलियों पर पुलिस भारी पड़ रही है। सारंडा की लड़ाई लंबी खिंचती जा रही है। इस दौरान नक्सलियों द्वारा किए जा रहे विस्फोटों की वजह से जवान, ग्रामीण और हाथी जैसे जानवर भी हताहत हो रहे हैं। हालांकि इस दौरान नक्सलियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन गोरिल्ला वार की पद्धति की वजह से नक्सली अभी भी सारंडा में टिके हुए हैं।

2025 से अब तक कई ब्लास्ट, जवान भी हुए हताहत

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला में मार्च 2025 से लेकर अब तक नक्सलियों द्वारा दो दर्जन से अधिक ब्लास्ट किए जा चुके हैं। 12 मई 2025 को हुए ब्लास्ट में झारखंड जगुआर के बम निरोधक दस्ते के आरक्षी मनोज कुमार दमाई बुरी तरह जख्मी हो गए, जिन्हें एयरलिफ्ट कर रांची लाकर इलाज करवाया जा रहा है। इससे पहले 5 मार्च को हुए ब्लास्ट में तीन जवान घायल हुए थे। 16 मार्च को हुए ब्लास्ट में एक जवान घायल हुआ था। जबकि, 22 मार्च को हुए ब्लास्ट में सीआरपीएफ के सब इंस्पेक्टर सुनील मंडल शहीद हो गए। वहीं सीआरपीएफ के ही हेड कांस्टेबल घायल हो गए। 13 अप्रैल को हुए ब्लास्ट में जगुआर के कांस्टेबल सुनील धान शहीद हो गए। वहीं पिछले तीन सालों में नक्सलियों के आईईडी विस्फोट में एक दर्जन से अधिक ग्रामीण मारे गए हैं, जबकि दर्जनों घायल भी हुए हैं। दो हाथी और एक दर्जन से अधिक जानवर भी मारे गए हैं।

आईईडी ब्लास्ट बना नक्सलियों का हथियार

कोल्हान में नक्सली अपने वजूद की आखिरी लड़ाई लड़ रहे हैं। इस लड़ाई में वे किसी की भी बलि लेने से परहेज नहीं कर रहे हैं। वर्तमान समय में नक्सलियों का एकमात्र मकसद है कि किसी भी तरह अपने ठिकानों तक पुलिस न पहुंचने दें। पुलिस से बचने के लिए कोल्हान के कुछ इलाकों में नक्सलियों ने आईईडी बमों का ऐसा चक्रव्यूह बना रखा है, जिसे भेदने में झारखंड पुलिस अब तक पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई है। आईईडी बमों की चपेट में आने से ग्रामीणों की भी जान जा रही है। उनके पशु भी विस्फोट में मारे जा रहे हैं। जंगल में जाना ग्रामीणों के लिए मजबूरी है, तो वहीं नक्सलियों के खात्मे के लिए सुरक्षा बलों के लिए भी जंगलों में उतरना बेहद जरूरी है। ऐसे में ग्रामीणों और सुरक्षा बलों दोनों का ही आईईडी बमों से सामना हो रहा है।

नक्सलियों का मंकी रिजर्व फॉरेस्ट में गढ़

झारखंड में नक्सलियों का सबसे मजबूत दस्ता फिलहाल सारंडा के मंकी रिजर्व फॉरेस्ट में डेरा डाले हुए है। 15 हजार से ज्यादा सुरक्षा बल नक्सलियों को घेरने के तैयार हैं। लेकिन मार्च तक माओवादियों के सफाए को लक्ष्य मानकर आगे बढ़ रहे सुरक्षा बल हर हाल में सारंडा फतह करने में आर-पार की लड़ाई तय है।

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