
RANCHI: झारखंड में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर है। वहीं दवा खिलाने का अभियान तेज कर दिया गया है। जिसके तहत रांची, गुमला, देवघर, रामगढ़, पूर्वी सिंहभूम, कोडरमा, गिरिडीह, पाकुड़, साहेबगंज, गढ़वा, लोहरदगा, बोकारो, धनबाद और सिमडेगा के प्रभावित प्रखंडों में 10 फरवरी से मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत करीब डेढ़ करोड़ लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
अब तक 86.89 प्रतिशत लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई जा चुकी हैं। एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि छूटे हुए लोगों और त्योहारों में घर लौटने वाले प्रवासियों को दवा खिलाने के लिए 10 मार्च तक विशेष कैंप लगाए जाएंगे। रमजान को देखते हुए कुछ क्षेत्रों में शाम के समय भी दवा खिलाने की व्यवस्था की गई है। सरकार का लक्ष्य 2027 तक भारत को फाइलेरिया मुक्त बनाना है।
लगातार पांच साल खानी है दवा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार फाइलेरिया एक गंभीर और विकृत रोग है, जिससे अपंगता तक हो सकती है। इससे बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है कि लोग लगातार पांच वर्षों तक साल में एक बार फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करें। यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों व दवा प्रशासकों द्वारा घर-घर जाकर लोगों को दी जा रही है। लोगों को जागरूक करने के लिए दीवार लेखन, पोस्टर, बैनर, फ्लेक्स और होर्डिंग के साथ-साथ स्कूल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं कम साक्षरता वाले क्षेत्रों में रात्रि चौपाल, ग्राम सभा, नुक्कड़ नाटक, ऑडियो-वीडियो संदेश, माइकिंग और डुगडुगी जैसे माध्यमों से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

