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Eye Health : मोबाइल-लैपटॉप का बढ़ता इस्तेमाल आंखों पर भारी; RIMS के डॉक्टर ने बताए बचाव के उपाय

by Kanchan Kumar
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रांची : लगातार कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन पर वक्त बिताने की आधुनिक आदत हमारी आंखों के लिए एक गंभीर खतरा बनती जा रही है। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची के नेत्र सर्जन डॉ. दीपांकर ने इस संकट को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने सचेत किया कि आंखों में लालिमा, जलन और सूखेपन (ड्राइनेस) जैसी शुरुआती दिक्कतों को कतई हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

घट रही है पलकें झपकाने की रफ्तार

डॉ. दीपांकर के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति सामान्य तौर पर एक मिनट में 15 से 20 बार अपनी पलकें झपकाता है। लेकिन डिजिटल युग में स्क्रीन पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित करने के कारण यह दर घटकर मात्र 5 बार प्रति मिनट रह गई है। पलकें कम झपकने से आंखों की प्राकृतिक नमी खत्म होने लगती है, जिसके परिणामस्वरूप सूखापन, गंभीर खुजली और कंजंक्टिवाइटिस जैसी बीमारियां जन्म लेती हैं। इसके अलावा, कमरे में खराब रोशनी, स्क्रीन की तेज ब्राइटनेस और धूल-मिट्टी वाला वातावरण आंखों पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

नेत्र विशेषज्ञ ने बताया कि आंखों में लालिमा, धुंधलापन, सिरदर्द, तेज रोशनी से चुभन और फोकस करने में परेशानी खतरे के लक्षण हैं। यदि इनमें से तीन या अधिक लक्षण लगातार दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

बचाव के लिए उन्होंने 20-20-20 का नियम अपनाने की सलाह दी; यानी हर 20 मिनट के काम के बाद, कम से कम 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को 20 सेकंड तक जरूर देखें। इसके अलावा काम के दौरान सचेत रहकर बार-बार पलकें झपकाएं और स्क्रीन को आंखों से सुरक्षित दूरी पर रखें।

उम्र से पहले आ रही है ऑपरेशन की नौबत

डॉ. दीपांकर ने बेहद मायूसी के साथ गिरते स्वास्थ्य स्तर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “पहले बुजुर्गों की आंखों का ऑपरेशन उम्र के आखिरी पड़ाव में होता था, लेकिन आज खराब जीवनशैली और खान-पान के कारण युवाओं और बच्चों को कम उम्र में ही आंखों की गंभीर बीमारियां घेर रही है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि कोई भी नेत्र विशेषज्ञ बच्चों को चश्मा नहीं देना चाहता, लेकिन उनकी भविष्य की रोशनी को बचाने के लिए भारी मन से चश्मे का पावर देना हमारी मजबूरी बन चुकी है।

उन्होंने लोगों से ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ए, सी और ई से भरपूर हरी सब्जियां व ड्राई फ्रूट्स खाने और साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच कराने की अपील की।

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