RANCHI: दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मिले ‘व्हाइट बैज’ को लेकर झारखंड की राजनीति में विवाद छिड़ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे सम्मान बताकर प्रचारित करने को भ्रामक करार दिया है, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक हताशा बताया है।
भाजपा प्रवक्ता ने बताया पहचान पत्र
भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि ‘व्हाइट बैज’ कोई अंतरराष्ट्रीय सम्मान नहीं, बल्कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की प्रशासनिक व्यवस्था के तहत दिया जाने वाला एक पहचान पत्र है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम जैसे बड़े वैश्विक सम्मेलन में विभिन्न भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को पहचानने के लिए अलग-अलग रंगों के बैज दिए जाते हैं। राष्ट्राध्यक्षों को सिल्वर बैज, उच्च पदस्थ सरकारी प्रतिनिधियों को व्हाइट बैज, मीडिया को ऑरेंज, सुरक्षा बलों को ब्लैक और स्वयंसेवकों को ब्लू बैज दिया जाता है। ये रंग किसी उपलब्धि या सम्मान का प्रतीक नहीं हैं।
अजय साह ने आरोप लगाया कि इस सामान्य प्रक्रिया को सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय सम्मान के रूप में पेश करना न केवल जनता को गुमराह करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर झारखंड की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले पर स्पष्ट और तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देने की मांग की।
झामुमो महासचिव बोले मान्यता का प्रतीक
वहीं झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने भाजपा के बयान को झूठ और हताशा का पुलिंदा करार दिया। उन्होंने कहा कि दावोस में ‘व्हाइट बैज’ एक निर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में आधिकारिक मान्यता का प्रतीक है, जिसके जरिए उच्च-स्तरीय बैठकों और निवेश संवादों तक सीधी पहुंच मिलती है। इसे मात्र रंगीन कार्ड कहना अंतरराष्ट्रीय मंचों की कार्यप्रणाली की समझ के अभाव को दर्शाता है।
विनोद पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को वैश्विक निवेशकों और नीति-निर्माताओं के साथ संवाद का अवसर उनकी नीतियों, स्थिर शासन और झारखंड के विकास मॉडल की वजह से मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब राज्य वैश्विक निवेश मानचित्र पर उभर रहा है, तब भाजपा जानबूझकर भ्रम फैलाकर छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है।

