RANCHI: वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत आम बजट का प्रसारण देखने की व्यवस्था कई जगहों पर की गई थी। वहीं चैंबर भवन में भी काफी संख्या में व्यापारियों, उद्यमियों और प्रोफेशनल्स ने बजट प्रसारण को देखा। इसके बाद मंत्री से लेकर राजनीतिक दलों के नेता और चैंबर के पदाधिकारियों ने बजट को लेकर प्रतिक्रिया दी।
देखें किसने क्या कहा

केंद्रीय बजट आम जनता, खासकर मध्यम वर्ग और गरीब तबके के लिए निराशाजनक है। बजट देखने में भले ही आकर्षक लगता हो, लेकिन इसमें न तो मध्यम वर्ग को कोई राहत दी गई है और न ही गरीबों के लिए कोई विशेष प्रावधान नजर आता है। केंद्र सरकार ने इस बार भी झारखंड की अनदेखी की है और अन्य राज्यों को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार कोई नई बात नहीं है। इस बजट में भी राज्य के लिए किसी विशेष पैकेज या सहायता की घोषणा नहीं की गई, जिससे विकास कार्यों को गति मिल सके। झारखंड सरकार ने कई बार केंद्र से बकाया राशि के भुगतान की मांग की, लेकिन उस पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया। महंगाई के दौर में टैक्स को लेकर मध्यम वर्ग को राहत की उम्मीद थी, लेकिन बजट में ऐसा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
दीपिका पांडेय सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 का ऐतिहासिक केंद्रीय बजट पेश किया जो 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का सशक्त प्रतिबिंब है। यह बजट विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को अधिक मजबूत करता है। बजट युवा, किसान, श्रमिक, महिला और उद्यमियों को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। ग्रामीण विकास से लेकर नवाचार, रोजगार सृजन, कौशल विकास और उत्पादन को प्रोत्साहन देने वाले प्रावधान इस बजट को सही मायनों में जन-जन का बजट बनाते हैं। स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, औद्योगिक विकास और आर्थिक सुदृढ़ता पर दिया गया जोर भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह बजट आर्थिक अनुशासन के साथ सामाजिक न्याय और जनकल्याण का संतुलित उदाहरण है, जो आने वाले वर्षों में भारत के समग्र विकास की मजबूत नींव रखेगा।
डॉ प्रदीप कुमार वर्मा, राज्यसभा सांसद सह महामंत्री भारतीय जनता पार्टी, झारखंड

इस बजट में झारखंड और रांची दोनों को विशेष लाभ होगा। रांची में निमहांस खोलने से पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को लाभ होगा। रांची पहले से ही मानसिक रोगियों के इलाज का केंद्र है। अब इसमें और विस्तार हो जाएगा। झारखंड को दूसरा लाभ फाइनेंस कमीशन की रिपोर्ट को बजट में सरकार द्वारा स्वीकार कर लिया है। जिससे झारखंड को लाभ होगा। बजट में कोई नया कर बिना लगाए हुए बुनियादी ढांचे और विभिन्न कल्याण योजनाओं की राशि बढ़ाई गई है। रिफॉर्म एक्सप्रेस को आगे बढ़ाया गया है। बुजुर्गों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। डेढ़ लाख केयरटेकर बनाने की एक क्रांतिकारी योजना प्रस्तावित है। कैंसर सहित कई कभी बीमारियों की दवाएं भी सस्ती होगी। मोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल,बैटरी, जूते व अन्य वस्तुएं सस्ती होगी।
प्रेम मित्तल, राष्ट्रीय मंत्री, भारतीय उद्योग व्यापार मंडल

टैक्स चोरों को छूट, जनता को झूठ यही इस बजट का सार है। केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा पेश बजट पूरी तरह मीठे शब्दों का पुलिंदा मात्र है। हर वर्ष कृषि, शिक्षा, रक्षा, स्वास्थ्य सभी के बजट में कटौती की जा रही है। बजट में समाज का कौन सा वर्ग केंद्र बिंदु में है साफ नहीं है। यह बजट किसके लिए बनाया गया है, इससे कौन लाभान्वित होगा किसी को समझ में नहीं आ रहा है। इंद्रजाल की तरह पूरी तरह भ्रम का बजट है। उद्योग कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा हर क्षेत्र में निराशा है। देश को खनिज उपलब्ध कराने की दिशा में झारखंड की भूमिका अव्वल नंबर की है लेकिन रेयर अर्थ कॉरिडोर से झारखंड को दूर रखा गया है। एमएसएमई सेक्टर में कम राशि का प्रावधान, मंझौले-छोटे उद्योगों को हतोत्साहित करेगा। पहले से आर्थिक मार झेल रहे लाखों उद्योग इससे प्रभावित होंगे। विदेश की सैर करने वालों को टैक्स में छूट दी गई है। झारखंड के लिए पूरी तरह निराशाजनक बजट है।
केशव महतो कमलेश, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस कमिटी

वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट समावेशी है। इसमें जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में कमी, हेल्थ सेक्टर और आयुर्वेद पर विशेष फोकस स्वागतयोग्य है। रांची में निम्हांस-2 की स्थापना भी एक सकारात्मक कदम है। हालांकि झारखंड के उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों के अनुरूप विशेष ध्यान अपेक्षित था। राज्य के समग्र विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन नेटवर्क, एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं और रेलवे नेटवर्क के व्यापक विस्तार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। वनों की रक्षा के कारण राज्य अपने कई संसाधनों का उपयोग नहीं कर पा रहा है, इसलिए इसके एवज में केंद्र सरकार द्वारा झारखण्ड को विशेष केंद्रीय फंड उपलब्ध कराना न्यायसंगत होता। थर्मल पावर, अतिरिक्त स्टील प्लांट्स, डिफेंस मैटेरियल यूनिट्स, उच्च शैक्षणिक संस्थान, स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन, महुआ बोर्ड और बायोफ्यूल निवेश जैसी पहलें राज्य में रोजगार और औद्योगिक विकास को तेज कर सकती थीं, लेकिन इनका उल्लेख बजट में नहीं है। झारखण्ड के आदिवासी बहुल इलाके आज तक रेल की सुविधा से वंचित हैं। क्रिटिकल मिनरल्स और नए बिजनेस फॉर्मेट्स पर बजट में प्रावधान है, लेकिन झारखण्ड को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली। यहां मौजूद कॉल बेड मीथेन को बायोफ्यूल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता था लेकिन इस क्षेत्र में निवेश नहीं हुआ।
आदित्य मल्होत्रा, अध्यक्ष, झारखंड चैंबर
बजट में हेल्थ, टूरिज्म, आयुर्वेद, बच्चियों के छात्रावास, छोटे शहरों का विकास, जीवनरक्षक दवाओं में छूट, जलमार्ग, स्पीड कॉरिडोर, बुद्धिस्ट सर्किट एवं उत्पादन प्रोत्साहन जैसे विषय शामिल हैं। परंतु योजनाओं की स्पष्ट रूपरेखा का अभाव दिखता है, जो विस्तृत अध्ययन के बाद ही स्पष्ट होगी। झारखण्ड के परिप्रेक्ष्य में जलमार्ग, खनिज या स्पीड कॉरिडोर को कोई विशेष तवज्जो नहीं मिली जबकि विकसित भारत 2047 के विजन में झारखण्ड अपनी अपार संसाधन क्षमता से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। निमहांस 2 की स्थापना स्वागतयोग्य है। जलमार्ग व स्पीड कॉरिडोर विकास के साथ-साथ, वन आच्छादित क्षेत्रों की अधिकता को देखते हुए प्रस्तावित तीन आयुर्वेद संस्थानों में से एक झारखण्ड में स्थापित किया जाए।
राम बांगड, उपाध्यक्ष, चैंबर

केंद्रीय बजट 2026-27 विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक संतुलित एवं दूरदर्शी कदम है। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ा हुआ निवेश, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण को प्रोत्साहन के अलावा एमएसएमई के लिए विशेष ग्रोथ फंड से उद्योग जगत में नई ऊर्जा आएगी। डिजिटल कनेक्टिविटी, शिक्षा और कौशल विकास पर फोकस से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही राज्यों को कर हिस्सेदारी बनाए रखने से संघीय ढांचे को मजबूती मिलेगी। हमें विश्वास है कि यह बजट व्यापार, निवेश और समावेशी विकास को नई गति देगा।
प्रवीण लोहिया, उपाध्यक्ष, चैंबर
बजट में बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, एमएसएमई, स्वास्थ्य और कर सुधारों पर दिया गया जोर आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए सकारात्मक है। रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय से सड़क, रेल और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क सुदृढ़ होगा, जिससे राज्य में उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। खनिज एवं स्टील आधारित उद्योगों के लिए वैल्यू-एडेड मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस झारखंड की औद्योगिक क्षमता को नई दिशा देगा। एमएसएमई सेक्टर के लिए क्रेडिट, इक्विटी फंड और क्लस्टर विकास योजनाएं छोटे व मध्यम उद्योगों को सशक्त बनाएगी। रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। बजट में न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) को 14 प्रतिशत किए जाने का निर्णय उद्योग जगत के लिए राहतकारी है, जिससे कंपनियों की कर-देनदारी घटेगी और निवेश व विस्तार को बल मिलेगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश से रांची स्थित केंद्रीय मनोरोग संस्थान, रांची जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
रोहित अग्रवाल, महासचिव, चैंबर

देश का आम बजट-2026 स्वतंत्र भारत का सबसे कमजोर और मायूस करने वाला है। भारत दुनिया का सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दावा करता रहा है। लेकिन 2025 में लगभग 1 लाख छोटी-बड़ी कंपनियां बंद हो गई। देश में बेरोजगारी, पलायन, महंगाई बढ़ रही है। आम बजट में कोई ठोस मिशन और विजन दिखाई नहीं दिया। उद्योग,कृषि,टेक्निकल यूनिवर्सिटी और श्रमिक कल्याण के लिए भी कुछ नहीं दिया गया। नामचीन उद्योगपतियों को छोड़ मझौले पूंजीपतियों और व्यापारियों को नजरअंदाज करने का काम किया गया है। बीजेपी एनडीए की देशभर में नफरती राजनीति के कारण एफडीआई नहीं हो पा रहा है।
कैलाश यादव, प्रवक्ता, राजद
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