चाईबासा : झारखंड में पश्चिमी सिंहभूम जिले के सबसे बड़े सदर अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित पांच बच्चों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाने की घटना में न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है। झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर 6 फरवरी 2026 को चाईबासा सदर थाना में लापरवाही का मामला दर्ज किया गया।

इस मामले में ब्लड बैंक के तकनीशियन मनोज कुमार समेत अन्य कर्मियों को आरोपी बनाया गया है। अक्टूबर 2025 में मामला सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था। पांच मासूम बच्चों को ब्लड बैंक की लापरवाही के कारण संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया था। हालांकि सरकार ने सिविल सर्जन डॉ. सुशांतो कुमार माझी और ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. दिनेश कुमार सवैयां को सस्पेंड कर दिया था। तकनीशियन मनोज कुमार की सेवा समाप्त कर दी थी, लेकिन कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई थी।
इस मामले में ‘झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा’ ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश मिला। घटना प्रकाश में आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने चाईबासा का दौरा कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय मिले। यह अब लोगों के बिग चर्चा का विषय बना हुआ हैं।
मुआवजे के तौर पर मात्र 2 लाख रुपये मिला
चाईबासा स्थित सदर अस्पताल परिसर में ब्लड बैंक के कर्मियों पर लापरवाही का आरोप को आजीवन सहयोग का आश्वासन दिया था। पीड़ितों के परिजनों का कहना है कि उन्हें मुआवजे के तौर पर मात्र 2 लाख रुपये थमा दिए गए, जबकि बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष माधव चंद्र कुंकल के नेतृत्व में पीड़ितों ने विधानसभा के समक्ष धरना दिया था। प्राथमिकी दर्ज होने पर कुंकल ने कहा कि यह घटना हमारी स्वास्थ्य प्रणाली की विफलता का जीता-जागता उदाहरण है, लापरवाही करने वाले दोषियों को जेल हो।
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