Ranchi: झारखंड उच्च न्यायालय ने ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को एक जनहित याचिका के मामले में 24 फरवरी तक शपथ पत्र दाखिल करने का मौका दिया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि यह आखिरी मौका है। अदालत ने आदेश में कहा है कि अगर इस बार 24 फरवरी को ग्रामीण विकास विभाग के सचिव शपथ पत्र दाखिल नहीं करते तो उन पर ₹10000 का जुर्माना किया जाएगा। यह जुर्माना उन्हें अपनी जेब से भरना होगा। जुर्माना राज्य के खजाने से अदा नहीं किया जा सकेगा।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने बुधवार को जारी किया है।
गौरतलब है कि पंकज कुमार यादव ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि ग्रामीण विकास विभाग ने हाल ही में 10 साल में जितने पुल बनाए हैं, उनकी गुणवत्ता ठीक नहीं है। इनमें से कई पुल डैमेज हो गए हैं। इस पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से जवाब दाखिल किया करने का अतिरिक्त समय मांगा गया। इस पर अदालत ने अंतिम मौका देते हुए शपथपत्र के लिए 24 फरवरी की तारीख निर्धारित की है और कहा है कि इस दिन ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को शपथ पत्र देना ही होगा।
खंडपीठ ने यह भी कहा कि अदालत के पूर्व निर्देशों के बाद भी अब तक अधिकारियों ने शपथ पत्र दाखिल नहीं किया है। 27 नवंबर को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद 9 जनवरी को राज्य सरकार ने आश्वासन दिया था, लेकिन, फिर भी शपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया। अदालत में याचिकाकर्ता को भी अनुमति दी है कि वह चाहे तो 11 मार्च तक अपना प्रति उत्तर दाखिल कर सकते हैं। मामले में अगली सुनवाई 18 मार्च निश्चित है।
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