Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उच्चतम न्यायालय ने हेमंत सोरेन के खिलाफ ईडी की क्रिमिनल कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह रोक लगने से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ ईडी द्वारा चलाई जा रही कार्रवाई पर विराम लग गया है। ईडी ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया था की भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक मामले में जारी समन का पालन नहीं किया गया। बताया जा रहा है की मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए ईडी को नोटिस जारी किया है।
दो हफ्ते बाद जवाब दाखिल कर सकते हैं याचिकाकर्ता
अदालत ने कहा है की ईडी इस मामले में चार सप्ताह के अंदर काउंटर एफिडेविट दाखिल करे। सुप्रीम कोर्ट की नोटिस ईडी के वकील को मिल गई है। अदालत का कहना है कि ईडी द्वारा चार हफ्ते के अंदर काउंटर एफिडेविट दाखिल होने के बाद याचिकाकर्ता की तरफ से दो हफ्ते के अंदर जवाब दाखिल किया जा सकता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई पर रोक लगाई।
हाई कोर्ट ने खारिज कर दी मुख्यमंत्री की याचिका
गौरतलब है कि ईडी की आपराधिक कार्रवाई शुरू होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसके खिलाफ झारखंड हाई कोर्ट गए थे। उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर कर ईडी की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। लेकिन हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका को खारिज कर दिया था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जब हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन के अधिवक्ता की तरफ से कहा गया था कि ईडी ने जो आपराधिक कार्रवाई मुख्यमंत्री के खिलाफ शुरू की है। वह कानून सम्मत नहीं है। जबकि ईडी ने अपने आरोपों को सही ठहराया था। फिलहाल अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई से पहले यथा स्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है। साथ ही ईडी की आपराधिक कार्रवाई पर रोक लगाई है।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद झारखंड के राजनीतिक और कानूनी हलके में चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि सत्तारूढ़ दल इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है। जबकि, विपक्ष इस पर सवाल उठा रहा है। अब लोगों की नजरें इस बात पर हैं कि ईडी 4 सप्ताह के अंदर सुप्रीम कोर्ट में क्या जवाब दाखिल करती है और सुप्रीम कोर्ट का अगली सुनवाई में क्या रुख होता है।

