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Kolhan Education News : सामने आए आदिवासी हो समाज के जीवन व मृत्यु के अनसुने पहलू

Kolhan Education News : कोल्हान विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मानवशास्त्री डॉ. ईवा रेचल का विशेष व्याख्यान

by Mujtaba Haider Rizvi
Discussion on life and death traditions of the Ho tribal community in Kolhan region of Jharkhand
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Chaibasa : कोल्हान यूनिवर्सिटी के स्नातकोत्तर मानवशास्त्र विभाग द्वारा मंगलवार को “एंथ्रोपोलिजकल फील्डवर्क टू डिजिटल फील्डनोट्स एमंग द हो कम्युनिटी ”(हो समुदाय में मानवशास्त्रीय क्षेत्र कार्य से लेकर डिजिटल क्षेत्र नोट्स तक) विषय पर एक दिवसीय आमंत्रित व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के गैलरी–4,ब्लॉक–ए में किया गया, जिसमें लगभग 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें विश्वविद्यालय के छात्र, शोधार्थी तथा विभिन्न सामाजिक विज्ञान विभागों के शिक्षक शामिल थे।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर की गई। इसके पश्चात विभाग की ओर से डॉ. मीनाक्षी मुंडा ने स्वागत एवं उद्घाटन संबोधन प्रस्तुत किया और कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर मुख्य वक्ता को पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता ईवा रेचल थीं, जो एक प्रतिष्ठित मानवशास्त्री हैं। वे वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिजेन में एसोसिएट फेलो तथा फ्रोबेनियस इंस्टीट्यूट, फ्रैंकफर्ट में एसोसिएट रिसर्चर के रूप में कार्यरत हैं। अपने व्याख्यान में उन्होंने मानवशास्त्र में फील्डवर्क की महत्ता, पारंपरिक फील्डनोट्स से डिजिटल फील्डनोट्स तक के विकास तथा हो समुदाय के बीच किए गए अपने शोध अनुभवों को साझा किया।

उन्होंने बताया कि झारखंड और ओडिशा के हो समुदाय के बीच लंबे समय तक किए गए फील्डवर्क के आधार पर उन्होंने कई महत्वपूर्ण शोध कार्य किए हैं। उन्होंने अपने प्रकाशित ग्रंथ “ नोशंस ऑफ लाइफ इन डेथ एंड डाइंग : द डेड इन ट्राइबल मिडिल इंडिया ” (2009) तथा “द हो : लिविंग इन ए वर्ल्ड ऑफ प्लेंटी ” (2020) का भी उल्लेख किया, जिनमें हो समुदाय के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने www.AdivasiFieldnotes.com⁠ वेबसाइट के माध्यम से आदिवासी समाज से संबंधित शोध सामग्री को व्यापक रूप से उपलब्ध कराने की पहल के बारे में भी जानकारी दी।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. डॉ अजिला गुप्ता ने अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद अपने कक्ष में डा ईवा रेचल और उनके पति डॉ. जॉर्गेन, जो एक वैज्ञानिक हैं, से शिष्टाचार भेंट की। कुलपति ने डॉ. ईवा का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय में अकादमिक सहयोग और संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की तथा हो समुदाय पर किए गए उनके लंबे और समर्पित शोधकार्य की सराहना की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रंजीत कर्ण, डॉ. मीनाक्षी मुंडा तथा डॉ. मयंक प्रकाश भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. मयंक प्रकाश ने किया। इस अवसर पर महिला कॉलेज चाईबासा की प्राचार्या डॉ. प्रीतिबाला, टाटा कॉलेज चाईबासा के संकाय सदस्य प्रो. आशा सुंडी, डॉ. विजय पियूष, डॉ. विकास नंदन, डॉ. अर्पित सुमन, डॉ. कंचन कच्छप, चक्रधरपुर से रविंद्र गिलुवा, मनोज, रश्मि पूर्ति, डोबरो बिरुली, तथा डॉ. तनुजा, डॉ. जक्लिन और डॉ. बेहुला सरदार सहित अनेक शिक्षक, शोधार्थी और छात्र उपस्थित थे।

इसके अतिरिक्त हो समाज से जुड़े सेवा–निवृत्त संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, जिनमें श्री सिंगा तिउ, श्री जय सिंह कुंतिया, श्री रामाय पूर्ति, श्री दुर्योधन मुंडिया, श्री रामसिंह होनहाग, श्री रामेश्वर सवैयाँ, श्री तिलक बारी, श्री नारायण पूर्ति, श्री राम सिंह सोय तथा श्री प्रीतम बंकिरा प्रमुख रूप से शामिल थे। छात्रों मे भोलेनाथ पान, जुरा बारी, देबास्मिता, इंडियन, राहुल, लेंबाती, सेवियन पूर्ति अवाम महिला कॉलेज के छत्राए भारी संख्या मे मौजूद थे,
व्याख्यान के पश्चात खुला संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों और शोधार्थियों ने फील्डवर्क और शोध पद्धति से जुड़े कई प्रश्न पूछे। कार्यक्रम के अंत में डीन, सोशल साइंस डॉ. परशुराम सियाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

यह व्याख्यान छात्रों और शोधार्थियों के लिए मानवशास्त्रीय फील्डवर्क की समझ को गहरा करने तथा डिजिटल युग में शोध पद्धतियों के नए आयामों को जानने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।

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