रांची। रांची विश्वविद्यालय अंतर्गत संचालित लॉ कॉलेज इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज में अगले शैक्षणिक सत्र से नामांकन पर झारखंड उच्च न्यायालय ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पारित किया। अदालत के इस फैसले के बाद संस्थान की व्यवस्थाओं और वहां पढ़ रहे विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बीसीआई के नियमों के अनुरूप आवश्यक बुनियादी सुविधाएं नहीं
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि संस्थान में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के नियमों के अनुरूप आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। विशेष रूप से लाइब्रेरी की कमी, योग्य प्रिंसिपल की नियुक्ति नहीं होना और कोर फैकल्टी का पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं होना प्रमुख कमियां बताई गईं। अदालत ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए फिलहाल नए नामांकन पर रोक लगाने का निर्णय लिया।
यह मामला अंबेश कुमार चौबे और अन्य की ओर से दायर याचिका के आधार पर अदालत पहुंचा। याचिका में कहा गया कि संस्थान की लापरवाही और नियामकीय मानकों की अनदेखी के कारण 418 विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि संस्थान को पहले ही आवश्यक कमियों को दूर करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन सुधार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए।
अदालत ने संस्थान की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई
अदालत को यह भी बताया गया कि बीसीआई ने अक्टूबर 2025 में ईमेल के माध्यम से संस्थान को स्पष्ट निर्देश दिया था कि छह माह के भीतर सभी जरूरी कमियों को दूर किया जाए, अन्यथा भविष्य में संबद्धता जारी रखना संभव नहीं होगा। इसके बावजूद संस्थान प्रबंधन ने अपेक्षित सुधार नहीं किए। इसी आधार पर अदालत ने संस्थान की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई।
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अनूप कुमार अग्रवाल ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि यह संस्थान सरकार के निर्देश के तहत स्व-वित्त पोषित व्यवस्था में संचालित हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद मानकों के पालन में गंभीर लापरवाही बरती गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने संस्थान को कमियों को जल्द दूर करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई और अदालत के अगले आदेश पर छात्रों व अभिभावकों की निगाहें टिकी हैं।

