

धनबाद : झारखंड स्टेट स्टूडेंट्स यूनियन ने 60-40 नाय चलतो नियोजन नीति के विरोध में दो दिवसीय झारखंड बंद की घोषणा की है। शनिवार को पहले दिन धनबाद में बंद का मिलाजुला असर दिखा। यूनियन के छात्र सड़कों पर नजर आए। नारेबाजी की। कुछ दुकानें स्वयं बंद रहीं तो अधिकतर बाजार खुले रहे। आटो का संचालन भी नियमित हुआ। फिलहाल कहीं से किसी भी तरह का अप्रिय समाचार प्राप्त नहीं हुआ है। गोधर और पुटकी बाजार के पास छात्रों ने जाम कर रखा है। पिछले डेढ़ घंटे से सड़क जाम है। लोगों को काफी परेशानी हो रही है। धनबाद शहर में प्रवेश करने के लिए झरिया रूट पकड़ जाना पड़ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कहा कि 60-40 की नीति स्वीकार नहीं करेंगे। चाहे इसके लिए बलिदान ही क्यों न देना पड़े। छात्र जीवन संघर्ष बलिदान और त्याग का मूल मंत्र है। छात्र अपने भविष्य और आने वाली पीढ़ी के लिए संघर्ष करेंगे। छात्रनेता अजीत कुमार महतो ने कहा कि बंदी को सफल बनाने के लिए विभिन्न आदिवासी मूलवासी सामाजिक संगठनों ने समर्थन दिया है। झारखंड स्टेट स्टूडेंट्स यूनियन की मांग है कि झारखंडी हित में क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा में खतियान आधारित संवैधानिक नियोजन नीति लागू कर सभी रिक्त पदों में झारखंडी को नियुक्त करें। एक तरफ विधायक सांसद लिखित रूप से मोहर हस्ताक्षर कर हमारी मांग को समर्थन कर रहें हैं, दूसरी ओर जेएसएससी द्वारा लगातार बाहरियों को नौकरी देने के लिए विज्ञापन जारी किया जा रहा है। विज्ञापन से झारखंड शब्द को गायब कर दिया जा रहा है। राज्य के विधायक-सांसद की दोहरी नीति से झारखंड के छात्र आक्रोशित हैं। प्रथम चरण में 42 सत्ता पक्ष के विधायक समेत कुल 72 विधायकों और 13 सांसदों से लिखित समर्थन मिल चुका है। दूसरे चरण में झारखंड के हाट बाजार में मांदर नगाड़ा बजाकर सखुआ पत्ता घुमाकर ग्रामीणों को जागरूक किया गया। तीसरे चरण में प्रखंड एवं जिला मुख्यालय के चौक चौराहों पर मशाल जुलूस निकला गया। अब दो दिन संपूर्ण झारखंड बंद रखने का निर्णय लिया गया। बंद के दौरान जरूरी सेवाएं बाधित नहीं की गईं। प्रदर्शन में अजीत महतो, राजा बाबू, कुश महतो, कृष्णा महतो, पप्पू महतो, संतोष महतो, देवेंद्र महतो, सिराज अंसारी, मनोज कुमार, सौरभ, गणेश महतो, गुरचरण महतो शामिल थे।

