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JAMSHEDPUR : जमशेदपुर की युवा लेखिका अन्वेषा ने किया कमाल, देश भर में हो रही चर्चा

by Rakesh Pandey
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-अपनी रचनाओं के लिए कई पुरस्कार कर चुकी हैं अपने नाम
जमशेदपुर : है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए, जिस तरह से भी हो ये मौसम बदलना चाहिए… यह लाइन जमशेदपुर की युवा लेखिका अन्वेषा पर पूरी तरह फिट बैठती हैं. उनकी लेखनी ने आज कल देश भर में चर्चा में हैं. जमशेदपुर में प्रतिभा को कोई कमी नही है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में हो, चाहे वो गायन हो, फिल्म हो, लेखन हो या साहित्य. यहां के प्रतिभावान छात्र-छात्राएं जमशेदपुर का नाम पूरे देश में गौरवान्वित कर रहे हैं. आज हम बात करने वाले हैं ऐसी ही एक शक्शीयत हैं जो महज 21 वर्ष की उम्र में ही कई कविताओं की किताब लिख चुकी हैं. जो पूरे देश में चर्चा में बनी हुई हैं. इनका नाम है अन्वेषा रथ. पश्चिमी सिंह भूम जिला अंतर्गत जमशेदपुर के बाराद्वारी की रहने वाली अन्वेषा की रचनाओं ने सबकों प्रभावित किया है. इनकी भाषा शैली इतनी जादूई है कि कोइ भी आकर्षित हो जाता है. आपको भी कहानियों को पढ़ने का शौक है तो इनकी पुस्तकों को पढ़ सकते हैं. उन्वेषा बताती हैं कि वो अभी वह रांची में रहकर ग्रेजुएशन की पढ़ाइ कर रही हैं. बचपन से कविता लिखने का शौक था. कविता बचपन से लिखते आ रही हूं. हालांकि बचपन में उतना ध्यान नहीं देती थी, लेकिन शौक कब करियर बन जाता है, कोई नहीं जानता.

उम्दा लेखन के लिए मिला पुरस्कार :
हाल ही में उनकी रचनाओं के लिए पुस्कृत किया गया है. उन्होंने द फोटोन न्यूज से बातचीत में बताया कि इस बार उन्हें ड्रीम पब्लिकेशन के द्वारा उड़ान 2.0 कार्यक्रम में बुलाया गया था. जहां 28 राज्यों के कवि शामिल थे. कार्यक्रम में पहला स्थान प्राप्त किया. इस अवसर पर ड्रीम पब्लिकेशन द्वारा पुरस्कृत किया गया. उन्होंने बताया कि उनकी खुद की 3 पुस्तकें पब्लिश हो चुकी हैं. इसमें ए होप, अनडिफाइंड, मेरे अल्फ़ाज शामिल हैं.

1500 से ज्यादा किताबों के लेखन में किया काम
अन्वेषा बताती हैं कि अब तक 1500 से ज्यादा किताबों के लेखन में अलग- अलग कवियों के साथ काम कर चुकी हूं. उन्होंने बताया कि उन्हें झारखंड लेखक संघ में भी शामिल किया गया है. यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है. इससे मैं काफी खुश हूं. सबसे कम आयु की सदस्य के रूप में वो लेखक संघ में शामिल हैं. उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने में उनके गुरु व लेखक संघ के अध्यक्ष चंदन प्रजापति का बहुत बड़ा योगदान है. उनके नेतृत्व में काफी कुछ सीख रही हैं. उन्होंने बताया कि वो अभी रांची के साईनाथ यूनिवर्सिटी से जूलॉजी में गेजुएशन के साथ- साथ बीएड की पढ़ाई कर कर रही हैं.

12वीं के बाद लेखन क्षेत्र में हुई सक्रिय :

अन्वेषा रथ ने बताया कि कविता या कहानी लेखन का शौक बचपन से था, लेकिन उस समय इसे गंभीरता से नहीं लेती थी. 12वीं के बाद उन्हें लगाया कि लेखन के क्षेत्र में कुछ अलग करना चाहिए, उसके बाद से अपनी पढ़ाई के साथ कविता लगातार लिखती रहती हूं. साथ ही अपनी रचनाओं को किताब का रूप भी दे रही हूं. उन्होंने कहा कि 12वीं के दौरान वो बीच में ओडिशा भी पढ़ाई करने चली गयी. उस समय तक कई रचनाओं को लिख चुकी थी, लेकिन उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देती थी. ओडिशा से जमशेदपुर आने पर उसी रचनाओं को पढ़ने के बाद उन्हें लगा कि वो इस क्षेत्र में कुछ कर सकती हैं. उन्होंने बताया कि शुरू में वो अपनी कलाओं को इंस्टाग्राम पर शेयर करती थी. लोग पसंद करने लगे. कमेंट और फीडबैक आने लगे तो लेखन के प्रति और सीरियस होती चली गयी.



कोविड में सोशल मीडिया एप का मिला सहारा

युवा लेखिका ने बताया कि कोरोना के समय सभी तरह के आयोजन, पब्लिकेशन, कार्यक्रम बंद हो गये थे, घर से निकालना मना था. ऐसे में उन्हें एक सोशल मीडिया एप का सहारा मिला. उन्होंने बताया कि “नोजोतो” नाम के एप का सहारा मिला. इस एप पर वो सिल्वर स्तर की पोजिशन पर है. उन्हें लाखों लोग इस एप पर कविता सुनते हैं. इसके बाद धीरे धीरे किताबो में काम करने के लिया लोग मुझसे संपर्क करने लगे.

…और देखते ही देखते रचनाएं होने लगी प्रकाशित
देखते ही देखते मेरी रचनाएं प्रकाशित होने लगी. उन्होंने बताया कि वो इतनी सारी रचनाएं लिख चुकी थी की एक किताब बन सकती थी, फिर वो बिना देर किये अपनी एक पुस्तक प्रकाशित करवाई. जो राजस्थान के साहित्य सहायक के द्वारा 2021 में प्रकाशित होने के लिए दी थी. लेकिन कोरोना के कारण 2022 में वो प्रकाशित हुई. फिर मुझे अलग अलग मंच पर लोग काव्य पाठ के लिए बुलाने लगे. कभी कवि सम्मेलन में फिर एक दिन मेरी रचनाओं के लिए मुझे नम्या नाम की मैगजिन वालो ने संपर्क किया.|उन्होंने बताया कि कोरोना के बाद सबसे पहला पुरस्कार उन्हें आरके पब्लिकेशंस द्वारा अंबाला में मिला. फिर दूसरा कोलकाता में उकियोटो द्वारा फिर ये सिलसिला बढ़ता गया. उन्होंने बताया कि बहुत जल्द उनकी और भी रचनाएं प्रकाशित होने वाली है. जिस प्रकार पाठनों ने जो प्या दिया है. उपेक्षा है आगे भी मिलता रहेगा. पाठकों के भी सुझाव जो आते हैं उसका मैं पूरी तरह ध्यान रखती हूं. यह सिलसिला अगे भी जारी रहेगा

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