

जमशेदपुर : जुबिली पार्क के जयंती सरोवर में शुक्रवार की सुबह हजारों मछलियां मरी हुई पाई गई। जिससे पूरे शहर में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि, मरने का अभी तक स्पष्ट कारण सामने नहीं आ सका है। दरअसल, रोजाना की तरह सुबह में लोग टहलने के लिए पहुंचे थे। तभी जयंती सरोवर से तेज दुर्गंध आने लगी। इस दौरान लोगों ने जाकर देखा तो भारी मात्रा में मछलियां मरी हुई थी, जिसे लेकर लोग काफी चिंतित दिखे। वहीं, ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने इसकी जानकारी संबंधित पदाधिकारियों को दी। इसके बाद मरी हुई मछलियों को बाहर निकालने का कार्य शुरू हुआ।

इसमें लगभग 30 कर्मचारियों को लगाया गया है। सुबह आठ बजे से ही सरोवर की सफाई चल रही है। कर्मचारियों का कहना है कि लगभग हजारों की संख्या में मछलियां मरी हुई है। सभी मछलियों को बाहर निकालने में दिनभर का समय लगेगा। इधर, जैसे-जैसे लोगों को इसकी जानकारी मिल रही थी वे देखने के लिए पहुंच रहे थे। परसुडीह निवासी रवि कुमार ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया से जानकारी मिली कि यहां मछलियां मरी हुई है, जिसे देखने के लिए वे आए हैं। उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इसपर सख्त कदम उठाने की जरूरत है। हर साल गर्मी के मौसम में मछलियां मरती है लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है। वहीं, साकची से प्रवीण कुमार भी पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि मछलियां मरने के कई कारण है। उसपर ध्यान देने की जरूरत है। अन्यथा इसी तरह मछलियां मरते रहेगी।

लोगों ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
भारी संख्या में मरी हुई मछलियों को देखकर लोग काफी चिंतित है। बिष्टुपुर निवासी जसप्रीत सिंह ने कहा कि मछलियों का मरना काफी गंभीर विषय है। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। ताकि हर साल गर्मी में उत्पन्न होने वाली यह समस्या दूर हो। इसी तरह और लोगों ने भी जांच की मांग की है।

मछलियों की मौत के ये हो सकते हैं कारण
जयंती सरोवर में हर दिन मछली पकड़ने वाले लोग भी पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि गुरुवार तक मछलियां मरी हुई नहीं थी। शुक्रवार की सुबह में अचानक से पता चला तो वे लोग देखने के लिए आए हैं। उनके अनुसार, मछलियों के मरने का कई कारण हो सकते हैं। भीषण गर्मी में पानी में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। इसके अलावा सरोवर में गिरने वाला गंदा पानी भी जिम्मेदार हो सकता है। इसके अलावा और भी कई कारण हो सकते हैं, जो जांच के बाद ही पता चल सकता है।
जलकुंभी से पटी स्वर्णरेखा
इधर, शहर की जीवन रेखा मानी जाने वाली स्वर्णरेखा नदी भी जलकुंभी से पट गई है। नदी के चारों तरफ जलकुंभी भर चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वर्णरेखा को जलकुंभी निगल रहा है। जलकुंभी की वजह से पानी में ऑक्सीजन की कमी हो रही है और इससे प्रदूषण स्तर बढ़ता जा रहा है, जो जलीय जीवों के लिए भी खतरनाक है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया है कि जलकुंभी से जलाशयों का पानी जहरीला हो जाता है और इसका प्रयोग किसी भी हाल में उचित नहीं है।
