

मास्को: रूस से अच्छी खबर आयी है। देश में गृहयुद्ध और तख्तापलट का खतरा टल गया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ बगावत करने वाली प्राइवेट आर्मी वैगनर के प्रमुख येवगेनी वी प्रिगोजिन व रूसी प्रशासन बीच समझौते के बाद प्राइवेट आर्मी के प्रमुख ने अपने लड़ाकों को वापस लौटने का आदेश दिया है। जिसके बाद से रूस में लोग जश्न मना रहे हैं। वहीं अब यह प्राइवेट आर्मी अपने कैंपों की ओर लौट रही है।

दोनों पक्षो के बीच हुए समझौते के तहत प्रिगोजिन भी रूस छोड़कर बेलारूस जाएंगे। रूसी मीडिया RT के मुताबिक, ये प्राइवेट आर्मी रोस्तोव शहर पर कब्जे के बाद मॉस्को शहर की ओर बढ़ी थी। यह शहर से मात्र 350 किलोमीटर की दूरी पर थीं। यही नहीं प्राइवेट आर्मी ने दो शहरों पर कब्जा भी कर लिया था। लेकिन ताजा अपडेट्स के तहत दोनों शहरों को प्राइवेट आर्मी ने खाली कर दिया है। इसके बाद रोस्तोव शहर से सभी बैन हटा दिए हैं। सड़कें फिर खुल गई हैं।

बेलारूस ने कराई डील, जानिए क्या मिलेगा प्रिगोजिन को
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री एस पेसकोव ने बताया कि प्रिगोजिन के खिलाफ चल रहे सभी क्रिमिनल केस बंद कर दिए जाएंगे। ग्रुप के जो लड़ाके हैं, उन पर भी कार्रवाई नहीं होगी। प्रिगोजिन को रूस छोड़कर बेलारूस जाना पड़ेगा। वैगनर के लड़ाके, जो विद्रोह में शामिल नहीं हुए थे, उन्हें रूसी रक्षा मंत्रालय के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर करना होगा। एक जुलाई से सभी लड़ाके डिफेंस मिनिस्ट्री के तहत काम करेंगे।

इस लिए वैगनर ग्रुप ने किया था विद्रोह
:: रूस और प्राइवेट आर्मी वैगनर के बीच तल्खी यूक्रेन के बाखमुत में वैगनर ट्रेनिंग कैंप पर मिसाइल अटैक के बाद शुरू हुई। रूस के इस हमलें में कई वैगनर सैनिक मारे गए थे। प्रिगोजिन ने क्रेमलिन को इसका दोषी मानते ही बगात की घोषण कर दी।
:: प्राइवेट आर्मी वैगनर प्रमुख प्रिगोजिन ने दावा किया है कि रूसी जनरलों ने यूक्रेन में उनके सैनिकों पर हवाई हमले करवाए हैं। उन्होंने कहा कि उनका अभियान रूस के खिलाफ नहीं बल्की रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु व रूस के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ है।
:: यह भी बात सामने आयी थी की प्रिगोजिन यूक्रेन युद्ध में जीते गए कुछ इलाकों पर कब्जा चाह रहे थे लेकिन राष्ट्रपति पुतिन और रक्षामंत्री सर्गेई इसके पक्ष में नहीं थे। इस वजह से अनबन चल रही थी। इसके बाद प्रिगोजिन विद्रोह के मूड में आ गए।
:: समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, दो सप्ताह पहले ही रूस के रक्षा मंत्रालय ने आदेश जारी कर यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहे सभी प्राइवेट लड़ाकों को रूस की सेना में शामिल होने को कहा था। इसके लिए सभी प्राइवेट मिलिट्री से एक कॉन्ट्रैक्ट साइन करने को कहा गया था। वैगनर ने ये समझौता करने से इनकार कर दिया था।
खतरे को देखते हुए रूसी सैनिकों ने शुरू की थी तैयारी
:: मॉस्को की ओर वैगनर आर्मी की कूच को देखते हुए राजधानी के दक्षिणी इलाके में रूसी सैनिकों ने चौकियां बना ली थी और हर जगह नाकेबंदी कर दी गई थी।
:: मॉस्को का रेड स्क्वायर को बंद कर दिया गया था। जगह-जगह सेना और टैंक तैनात कर दिए गए थे। तीन हजार से ज्यादा एलीट चेचन लड़ाकों ने भी मोर्चा संभाला है।
:: वहीं मॉस्को में सुरक्षा के लिहाज से 1 जुलाई तक सभी सामूहिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गयी। स्कूल- कॉलेज में भी किसी प्रोग्राम की अनुमति नहीं थी
क्या है प्राइवेट आर्मी जिसने रूस के खिलाफ किया था विद्रोह
वैगनर ग्रुप सैनिकों का एक प्राइवेट संगठन है। यह 2014 से पहले यह गुप्त संगठन था, जो यूक्रेन, अफ्रीका और मध्य पूर्व में सक्रिया था। इसमें अधिकांश रूस की इलीट रेजिमेंट और स्पेशल फोर्सेज के लोग हैं। समूह में 50 हजार से अधिक सैनिक हैं। वैगनर ग्रुप की शुरुआत रूसी सेना के पूर्व अधिकारी दिमित्री उत्किन ने की थी। वैगनर ने 2014 में अपने पहले अभियान में क्रीमिया पर कब्जा करने में रूस की मदद की थी। यूक्रेन युद्ध में भी यह रूस की तरफ से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और यूक्रेन के कई शहरों पर कब्जा करने में इस आर्मी की भूमिका रही है।
