Home » JHARKHAND HEALTH NEWS: अब फर्जी डेंटिस्ट पर चलेगा काउंसिल का डंडा, बिना लाइसेंस चल रहे क्लीनिक पर होगी कार्रवाई

JHARKHAND HEALTH NEWS: अब फर्जी डेंटिस्ट पर चलेगा काउंसिल का डंडा, बिना लाइसेंस चल रहे क्लीनिक पर होगी कार्रवाई

आप भी डेंटल काउंसिल में कर सकते हैं कंप्लेन

by Vivek Sharma
डेंटिस्ट पर कार्रवाई
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

RANCHI: झारखंड में बिना लाइसेंस डेंटल क्लीनिक चलाने वालों पर अब सख्त कार्रवाई की तैयारी है। स्टेट डेंटल काउंसिल ने साफ कर दिया है कि बिना रजिस्ट्रेशन डेंटल प्रैक्टिस करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पूरे राज्य में मॉनिटरिंग बढ़ाई जा रही है और ऐसे क्लीनिकों की पहचान की जा रही है जो बिना परमिशन के संचालित हो रहे हैं।

1908 ने कराया है रजिस्ट्रेशन

डेंटल काउंसिल के अनुसार अब तक झारखंड में कुल 1908 डेंटिस्ट ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। काउंसिल ने सभी रजिस्टर्ड डॉक्टरों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्लीनिक के बाहर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को डिसप्ले बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लगाएं, ताकि मरीजों को यह पता चल सके कि जिस डॉक्टर से वे इलाज करा रहे हैं वह अधिकृत और पंजीकृत है।

बिना रजिस्ट्रेशन प्रैक्टिस की शिकायत

डेंटल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ सुशील कुमार का कहना है कि कई जगहों पर ऐसे लोग भी डेंटल डॉक्टर बनकर क्लीनिक चला रहे हैं जिनके पास जरूरी डिग्री या रजिस्ट्रेशन नहीं है। ऐसे मामलों से मरीजों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है। इसी कारण काउंसिल ने इस पर सख्त रुख अपनाया है और जिला स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही।

आम लोग भी कर सकते हैं कंप्लेन

अगर किसी इलाके में बिना लाइसेंस या बिना रजिस्ट्रेशन के डेंटल क्लीनिक संचालित होने की जानकारी मिलती है तो आम लोग भी इसकी शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए डेंटल काउंसिल में शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था की गई है। सदर हॉस्पिटल रांची स्थित डेंटल काउंसिल के ऑफिस में शिकायत कर सकते है। शिकायत मिलने के बाद जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

दूसरे राज्य के लिए एनओसी जरूरी

काउंसिल ने यह भी स्पष्ट किया है कि झारखंड में रजिस्टर्ड डेंटिस्ट यदि किसी दूसरे राज्य में जाकर प्रैक्टिस करना चाहते हैं, तो उन्हें झारखंड स्टेट डेंटल काउंसिल से एनओसी लेना अनिवार्य होगा। बिना एनओसी के दूसरे राज्यों में प्रैक्टिस करने पर भी नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।एक्सपर्ट्स की मानें तो कि इस तरह की सख्ती से फर्जी डॉक्टरों पर लगाम लगेगी और मरीजों को सुरक्षित और सही इलाज मिल सकेगा। डेंटल काउंसिल का कहना है कि मरीज भी इलाज से पहले डॉक्टर के क्लीनिक में लगे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को जरूर देखें और अगर कोई अनियमितता नजर आए तो तुरंत इसकी सूचना दें।

Related Articles

Leave a Comment