नई दिल्ली। भारतीय सेना के जवानों की शौर्यगाथाओं ने देश को गर्वित किया है। उनके साहस और बलिदान का सर्वोत्तम सम्मान और सलाम होता है। वे देश की रक्षा के लिए अपने जीवन न्योछावर करते हैं, और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर का सम्मान मिलता है, जो देश के शौर्य के प्रतीक के रूप में माना जाता है। हाल ही में हुए एक घटना ने एक जवान की मौत के परिस्थितियों को लेकर उठे सवाल को आगे बढ़ा दिया है। इस घटना के बाद ‘अग्निवीर योजना’ को लेकर फिर विवाद छिड़ गया है।
अग्निवीर को नहीं मिला गार्ड ऑफ ऑनर/ यह हुई थी घटना
बीते मंगलवार 10 अक्टूबर को, एक जवान की गोली लगने से मौत हो गई। जम्मू कश्मीर के पुंछ में वह (LoC) लाइन ऑफ कंट्रोल पर सेना की ओर से तैनात किए गए थे। इस मामले से जुड़ा एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि जवान के परिवार वाले उन्हें कंधा दे रहे हैं। इसी बीच ख़बर है कि जवान को सेना की तरफ़ से कोई ‘गार्ड ऑफ़ ऑनर’ नहीं दिया गया और न ही अंतिम विदाई। जवान की भर्ती अग्निवीर योजना के ज़रिए सेना में हुई थी। इस जवान का नाम अमृतपाल सिंह था, और उम्र केवल 21 साल थी।
मौत की परिस्थितियों को लेकर चल रही जांच
अग्निवीर अमृतपाल की मौत की परिस्थितियों को लेकर आपराधिक जांच की जा रही है, क्योंकि यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि उनकी मौत एक्सीडेंट थी या खुदकुशी। अग्निवीर योजना के तहत, जवानों को गार्ड ऑफ ऑनर का सम्मान दिया जाता है, जो उनके बलिदान और शौर्य का प्रतीक होता है। इसके बावजूद, अमृतपाल सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर नहीं मिला। इतना ही नहीं, अमृतपाल के परिवार वालों को भी उनके शव को अंतिम संस्कार देने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
विपक्ष ने अग्निवीर योजना पर साधा निशाना
इस मामले में अमृतपाल के परिवार वालों की शिकायतें बढ़ गई हैं, और विपक्षी पार्टियां भी मोदी सरकार और अग्निवीर योजना पर जमकर निशाना साध रही हैं। जम्मू के डिफेंस PR ऑफिसर ने बताया कि अग्निवीर अमृतपाल सिंह की मौत की परिस्थितियों की जांच की जा रही है, और गार्ड ऑफ ऑनर न मिलने को लेकर उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली है। इसके बावजूद, सैनिक कल्याण के निदेशक और रिटायर्ड ब्रिगेडियर BS ढिल्लों के अनुसार, उनके विभाग को सैन्य अधिकारियों से अग्निवीर के निधन के बारे में कोई अपडेट नहीं मिली थी। उन्होंने आगे बताया कि जवान को पुलिस ने ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया है।
क्या रहा सेना का बयान?
अग्निवीर अमृतपाल सिंह के अंतिम संस्कार के दौरान सेना द्वारा ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ नहीं दिए जाने पर सेना ने एक बयान में कहा कि अग्निवीर अमृतपाल सिंह की मौत आत्महत्या के कारण हुई थी, और इसलिए वे गार्ड ऑफ ऑनर या सैन्य अत्येष्टि का सम्मान नहीं प्राप्त कर सकते थे।
बोले मुख्यमंत्री भगवंत मान, पंजाब सरकार देगी मौत को मान्यता
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार के साथ कड़ा प्रतिरोध करने की घोषणा की है। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि अग्निवीर अमृतपाल सिंह की शहादत को लेकर, उनकी सरकार उनकी परिवार के प्रति उनके बलिदान को मान्यता देगी, और वे सैनिक के परिवार को एक करोड़ रुपये की राशि प्रदान करेंगी। उन्होंने कहा कि अमृतपाल सिंह देश के शहीद हैं, और उनके सर्वोत्तम सम्मान का हक है।
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