Ranchi: झारखंड में बच्चों की ट्रैफिकिंग रोकने के लिए एक नई पहल की गई है। अब इस अपराध पर डिजिटल तरीके से रोक लगाई जाएगी। इसके लिए एआई पर आधारित टूल ‘रक्षा’ को देश भर में लॉन्च किया गया है। झारखंड जैसे राज्य में यह टूल बेहद कारगर साबित हो सकता है। इसे लेकर रांची में एआई इंपैक्ट समिट कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में एआई सुरक्षा टूल से संबंधित बातें लोगों को बताई गईं और लोगों को इसके प्रति जागरूक किया गया। इसमें बताया गया है कि रक्षा टूल को बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन नामक संस्था ने विकसित किया है। इस टूल के जरिए देश भर में बच्चों से संबंधित आंकड़ों का अध्ययन किया जा सकता है। यह पता लगाया जा सकता है कि किन इलाकों में बच्चों की ट्रैफिकिंग अधिक हो रही है।
बाल विवाह को लेकर कौन से इलाके ज्यादा संवेदनशील हैं। यह एआई टूल इस नजरिए से भी अध्ययन करने में सक्षम है। साथ ही इसके जरिए ट्रैफिकिंग में शामिल गिरोहों की भी निगरानी की जा सकती है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन नामक संस्था झारखंड के सभी जिलों में काम कर रही है। संस्था के लोगों ने बताया कि यह टूल तीन स्तर पर काम करेगा।
पहला आर्थिक सुरक्षा से जूझ रहे परिवारों की पहचान कर उन्हें बाल विवाह जैसे अपराध से रोकेगा। दूसरे, ट्रैफिकिंग जैसे संगठित अपराधों का पूर्वानुमान लगाकर ऐसी घटनाओं को रोकेगा। इसके अलावा, ट्रैफिकिंग जैसी घटनाएं अंजाम देने वाले गिरोह की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी। तीसरा, यह टूल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का पता लगाएगा। यह सामग्री किस प्लेटफार्म पर है। उनकी आईपी एड्रेस का पता लगाया जाएगा और फिर उन पर कार्रवाई आसान हो सकेगी। एआई इंपैक्ट समिट के कार्यक्रम में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी आए थे। उन्होंने कहा कि इस तकनीक के इस्तेमाल से गरीब बच्चों को अधिक फायदा होगा।

