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Chaibasa News: एक साल से DMFT की राशि नहीं खर्च की तो वापस ले लेगा प्रशासन, विभागों को DC की चेतावनी

DMFT योजनाओं की प्रगति की समीक्षा, लंबित योजनाओं पर सख्ती के निर्देश, डीएमएफटी मद में 1712 करोड़ रुपये की राशि खर्च, 295 करोड़ रुपये की राशि अवशेष

by Rajeshwar Pandey
चाईबासा में DMFT योजनाओं की समीक्षा में DC की सख्ती, एक साल से खर्च नहीं हुई राशि वापस लेने के निर्देश, 295 करोड़ रुपये अवशेष।
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Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त चंदन कुमार की अध्यक्षता में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) मद से संचालित आधारभूत संरचना निर्माण योजनाओं की प्रगति को लेकर समीक्षात्मक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार निदेशक-लेखा प्रशासन सह स्वनियोजन सुनीला खलको सहित विभिन्न कार्यकारी विभागों के कार्यपालक एवं सहायक अभियंता मौजूद थे।

बैठक के दौरान उपायुक्त ने बताया कि डीएमएफटी मद से अब तक करीब 1712 करोड़ रुपये की राशि विभिन्न कार्यकारी विभागों को संरचना निर्माण कार्यों के लिए निर्गत की गई है, जिसमें से 1387 करोड़ रुपये की राशि व्यय हो चुकी है। वहीं 1273 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुके हैं। शेष लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र को लेकर उपायुक्त ने सभी कार्यकारी विभागों को निर्देश दिया कि तीन दिनों के भीतर जांच कर संबंधित उपयोगिता प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से जमा करें।

समीक्षा में यह भी सामने आया कि विभिन्न कार्यकारी विभागों के अलग-अलग खातों में डीएमएफटी मद की लगभग 295 करोड़ रुपये की राशि अवशेष पड़ी है। इस पर उपायुक्त ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि जिन खातों में एक वर्ष से अधिक समय से राशि पड़ी हुई है, उसका मूल्यांकन कर नियमानुसार एक सप्ताह के भीतर राशि वापस करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
डीएमएफटी अंतर्गत संचालित पेयजल योजनाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने संबंधित कार्यपालक अभियंता एवं डीएमएफटी पीएमयू टीम को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं की वर्तमान स्थिति, संचालन एवं संधारण से संबंधित भुगतान की स्थिति का विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही वित्तीय वर्ष 2024-25 में आवंटित योजनाओं में टेंडर निष्पादन, एग्रीमेंट एवं भौतिक प्रगति की जांच कर प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश दिए गए।

बैठक में वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2023-24 तक स्वीकृत एवं आवंटित योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 तक स्वीकृत जिन योजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है तथा वित्तीय वर्ष 2023-24 में स्वीकृत जिन योजनाओं में अब तक कार्य प्रगति शून्य है, उन्हें रद्द करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए।इसके अलावा उपायुक्त ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में नई योजनाओं का आवंटन उन्हीं कार्यकारी विभागों को किया जाएगा, जिनके द्वारा पूर्व में आवंटित योजनाओं में संतोषजनक एवं अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित की गई होगी। बैठक में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया।

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