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Chaibasa heartbroken news : एंबुलेंस नहीं मिली तो चंदे के पैसे से 20 रुपए मे खरीदा था थैला, उसी में ले गए अपने बच्चे का शव, मानवता को शर्मसार करने वाली घटना से स्वास्थ विभाग में हड़कंप, सिविल सर्जन ने दी सफाई

सरकारी नियमों के तहत बीपीएल श्रेणी के लोगों के लिए तेल (फ्यूल) का खर्च अस्पताल देता है, लेकिन इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए परिजनों ने समय नहीं दिया।

by Reeta Rai Sagar
Chaibasa News
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Chaibasa (Jharkhand): पश्चिमी सिंहभूम एक गरीब पिता की लाचारी ने सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है। नोवामुंडी प्रखंड के बालजोड़ी गांव के डिम्बा चातोम्बा अपने चार वर्षीय बच्चे को इलाज के लिए सदर अस्पताल चाईबासा लेकर आए थे, लेकिन शुक्रवार को बच्चे की मौत हो गई। डिम्बा के पास घर जाने के लिए पैसे नहीं थे और अस्पताल में एम्बुलेंस नहीं मिली। लाचार पिता ने अपने बच्चे का शव एक झोले में भरकर घर ले जाने का फैसला किया। वह सदर अस्पताल में घंटों एम्बुलेंस का इतंजार करते रहे, लेकिन जब नहीं मिली तो थक-हारकर झोले में शव लेकर घर चले गए।

नर्स ने कहा कि गाड़ी नहीं है : डिम्बा चतोम्बा

डिम्बा ने बताया कि बच्चे की मौत दोपहर 12 बजे हो गई थी, लेकिन एम्बुलेंस नहीं मिली। नर्स ने कहा कि गाड़ी नहीं है, जब आएगी तब मिलेगी। चार घंटे इतंजार करने के बाद सफाई कर्मियों ने कुछ पैसे चंदा करके दिए, तब जाकर 20 रुपये में एक झोला लेकर शव घर ले गए।

इस घटना ने सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग कह रहे हैं कि क्या यही है सरकार की गरीबों के लिए व्यवस्था? डिम्बा की लाचारी ने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है।

सिविल सर्जन ने क्या कहा?

सिविल सर्जन डॉ. भारती मिंज ने बताया कि 18 तारीख की शाम को कृष्णा चटुम्बा (उम्र 4 माह) बच्चे लेकर बेहद गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था। बच्चे को पिछले सात दिनों से तेज बुखार और लूज मोशन की शिकायत थी। अस्पताल पहुंचने पर डॉ. संदीप बोधरा ने तत्काल इलाज शुरू किया, लेकिन बच्चे का वजन मात्र 3 किलो 600 ग्राम था और उसे सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ हो रही थी।​

रेफर करने के बावजूद परिजनों ने जताई असमर्थता​

उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने बच्चे की स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर के एमजीएम (MGM) अस्पताल रेफर करने का सुझाव दिया था। हालांकि, बच्चे के पिता ने अपनी आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए बाहर जाने से मना कर दिया और सदर अस्पताल में ही इलाज जारी रखने का अनुरोध किया।

सिविल सर्जन ने कहा कि डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की थी। लेकिन, अगले दिन दोपहर 1:15 बजे बच्चे की मृत्यु हो गई।​ डॉ. मिंज ने स्पष्ट किया कि अस्पताल ने तुरंत ‘बिरसा युवा सेवा समिति’ के शव वाहन से संपर्क किया था। लेकिन उस समय वह वाहन मनोहरपुर में था और उसे चाईबासा वापस आने में लगभग 2 घंटे का समय लगने वाला था। अस्पताल प्रशासन ने पिता को इंतजार करने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि बच्चे के पिता बहुत व्याकुल थे और शाम होने से पहले अपने गांव पहुंचना चाहते थे।

उन्होंने शव वाहन का इंतजार नहीं किया और बिना वार्ड की नर्स या किसी अधिकारी को सूचना दिए, बच्चे का शव झोले में रखकर वहां से निकल गए। इसी कारण अस्पताल प्रबंधन को उन्हें रोकने या मदद करने का मौका नहीं मिल सका। बच्चे के पिता के पास फोन और पैसे की कमी थी।

मरीजों के परिजनों ने चंदा इकट्ठा कर की थी आर्थिक सहायता

उन्होंने बताया कि स्थिति को देखते हुए अस्पताल की नर्सों और वहां मौजूद अन्य मरीजों के परिजनों ने चंदा इकट्ठा कर उनकी आर्थिक सहायता भी की थी। सरकारी नियमों के तहत बीपीएल श्रेणी के लोगों के लिए तेल (फ्यूल) का खर्च अस्पताल देता है, लेकिन इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए परिजनों ने समय नहीं दिया।

मामले की जांच करने पहुंचे एसडीओ

चाईबासा एसडीओ संदीप अनुराग टोपनो ने शनिवार को सदर अस्पताल पहुंच कर मामले की जांच पड़ताल की। इस मामले में एसडीओ ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। बच्चे को रक्त कि जांच हुआ तो मलेरिया पॉजिटिव पाया गया था। जिसका इलाज भी हुआ है। बच्चों को लेकर उसके उनके पिता आए थे। इसके स्थिति काफी नाजुक था।

गांव में मचा मातम

शनिवार को नोवामुंडी प्रखंड के बालजोड़ी गांव के डिम्बा चातोम्बा घर में मातम मचा है। घटना के सूचना मिलने के बाद गांव के लोगों ने भी इस घटना को लेकर काफी दुखी हैं। शनिवार सुबह से ही लोगों का घर आना जाना लगा रहा।

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