चाईबासा : केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चे द्वारा 12 फरवरी को आहूत देशव्यापी श्रमिक हड़ताल का असर पश्चिमी सिंहभूम जिले में भी देखने को मिला। चाईबासा सहित जगन्नाथपुर और झींकपानी क्षेत्रों में मजदूर संगठनों ने भारत बंद का समर्थन करते हुए सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर विरोध जताया, सड़क जाम और दुकानों-प्रतिष्ठानों को बंद कराया।

राष्ट्रव्यापी हड़ताल में करीब 30 करोड़ श्रमिक शामिल
संयुक्त ट्रेड यूनियनों का दावा है कि इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बैंक कर्मियों, सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों तथा संगठित और असंगठित क्षेत्रों के करीब 30 करोड़ श्रमिक शामिल हो रहे हैं। हड़ताल के कारण बिजली, परिवहन, बीमा, स्वास्थ्य, शिक्षा, गैस और पेयजल आपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं पर आंशिक असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
नीतियां श्रमिक और किसान हितों के खिलाफ हैं- यूनियन नेता
हालांकि कुछ क्षेत्रों में सेवाएं सामान्य भी रहीं और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए रहा। आईएनटीयूसी, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीआईटीयू, एआईयूटीयूसी और यूटीयूसी सहित विभिन्न संगठनों ने चार नए श्रम कानूनों को वापस लेने, प्रस्तावित बीज विधेयक और विद्युत संशोधन विधेयक को निरस्त करने तथा परमाणु ऊर्जा उत्पादन में निजी कंपनियों की भागीदारी के प्रस्ताव को रद्द करने की मांग उठाई है। यूनियन नेताओं का कहना है कि ये नीतियां श्रमिक और किसान हितों के खिलाफ हैं, इसलिए देशव्यापी आंदोलन के माध्यम से सरकार पर पुनर्विचार का दबाव बनाया जा रहा है।
मजदूर संगठनों ने जोरदार तरीके से दर्ज कराई अपनी उपस्थिति
चाईबासा में बंद के दौरान बाजारों में आंशिक असर देखा गया। कुछ जगहों पर दुकानें बंद रहीं, जबकि कई स्थानों पर सामान्य गतिविधियां भी जारी रहीं। प्रशासन द्वारा शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कुल मिलाकर, देशव्यापी हड़ताल की गूंज पश्चिमी सिंहभूम जिले में भी सुनाई दी और मजदूर संगठनों ने जोरदार तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

