Home » Chaiti Chhath 2026 : चैती छठ 2026 : कल नहाय-खाय के साथ शुरू होगा महापर्व छठ, 25 मार्च को होगा समापन

Chaiti Chhath 2026 : चैती छठ 2026 : कल नहाय-खाय के साथ शुरू होगा महापर्व छठ, 25 मार्च को होगा समापन

by Rakesh Pandey
Chaiti Chhath 2026
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

फीचर डेस्क : पटना सहित पूरे बिहार, मिथिला और पूर्वांचल क्षेत्र में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ 22 मार्च 2026 (कल) से आरंभ होगा। चार दिवसीय इस पर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ के साथ होगी, जबकि इसका समापन 25 मार्च को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ किया जाएगा। सनातन परंपरा में यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन दर्शन, अनुशासन और प्रकृति के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

चैत्र मास और छठ पर्व का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र मास को सृष्टि के आरंभ का काल माना गया है। यही समय नवसंवत्सर, नई ऊर्जा और नए संकल्पों का प्रतीक होता है। ऐसे में सूर्योपासना और षष्ठी देवी की पूजा जीवन में सकारात्मकता और संतुलन लाने का मार्ग प्रशस्त करती है।

ज्योतिष के अनुसार, ऋग्वेद में सूर्य को सृष्टि का केंद्र बताया गया है। अस्ताचलगामी और उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा इसी वैदिक विचारधारा से जुड़ी हुई है।

छठ पूजा 2026 की तिथि और अनुष्ठान

चैती छठ का आयोजन चार दिनों तक चलता है, जिसमें प्रत्येक दिन का विशेष धार्मिक महत्व होता है:

22 मार्च 2026 – नहाय-खाय (पर्व की शुरुआत)
23 मार्च 2026 – खरना (उपवास और प्रसाद)
24 मार्च 2026 – संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य)
25 मार्च 2026 – उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य और व्रत समापन)

इस दौरान व्रती पूरी श्रद्धा और नियम के साथ व्रत का पालन करते हैं, जिसमें शुद्धता, सात्विकता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जाता है।

षष्ठी देवी और सूर्योपासना की परंपरा

छठ पर्व में षष्ठी देवी की पूजा का विशेष महत्व है, जिन्हें संतान की सुरक्षा और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। सूर्योपासना की यह परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है और इसे प्रकृति तथा मानव जीवन के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम माना जाता है। मिथिला और पूर्वांचल क्षेत्र में यह पर्व विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है, जहां घाटों पर सामूहिक पूजा और अर्घ्य का आयोजन होता है।

छठ महापर्व का संदेश : अनुशासन, स्वच्छता और प्रकृति से जुड़ाव

छठ महापर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आत्मसंयम का संदेश भी देता है। व्रती इस दौरान नदी, तालाब और जलाशयों की सफाई कर पूजा स्थल को पवित्र बनाते हैं।

Read Also- Gangaur Mata Shahi Sawari : जयपुर में गणगौर माता की शाही सवारी आज, जनानी ड्योढ़ी से निकलेगा भव्य जुलूस

Related Articles

Leave a Comment