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Chaiti Chhath 2026 : आज पहला अर्घ्य, छठ घाटों पर तैयारियां पूरी, श्रद्धा के साथ होगा सूर्य उपासना का पर्व

by Rakesh Pandey
Chaiti Chhath 2026
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फीचर डेस्क : चैती छठ 2026 का पावन पर्व पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। सूर्य उपासना का यह महापर्व नहाय-खाय के साथ शुरू हो चुका है और आज यानी मंगलवार की शाम व्रती महिलाएं पहला अर्घ्य देंगी। इस अवसर पर शहर से लेकर गांवों तक छठ घाटों की व्यापक सफाई और सजावट की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। घाटों पर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूजा-अर्चना कर सकें।

Chaiti Chhath 2026: पहला अर्घ्य आज, घाटों पर उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़

चैती छठ के तीसरे दिन व्रती महिलाएं शाम के समय अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं, जिसे पहला अर्घ्य कहा जाता है। इस दौरान महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में घाटों पर पहुंचकर छठ माता की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि डूबते सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन में सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली बनी रहती है।

छठ घाटों की सफाई और तैयारियां पूरी

पर्व को लेकर सोमवार को विभिन्न क्षेत्रों में घाटों की साफ-सफाई का कार्य पूरा किया गया। स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से नदी घाटों, तालाबों और जलाशयों को स्वच्छ बनाया गया है। घाटों पर रोशनी, बैरिकेडिंग और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी घाट भी तैयार किए गए हैं।

घाटशिला और मऊभंडार जैसे क्षेत्रों में अमाईनगर घाट, सूर्य मंदिर घाट गोपालपुर सहित कई प्रमुख स्थानों पर विशेष तैयारी देखने को मिली। यहां व्रती महिलाएं पूजा-अर्चना के बाद सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करेंगी।

खरना के बाद शुरू हुआ 36 घंटे का निर्जला व्रत

चैती छठ के दूसरे दिन खरना का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रती महिलाएं स्नान-ध्यान के बाद मिट्टी के चूल्हे पर खीर और रोटी का प्रसाद बनाती हैं। यह प्रसाद पहले कुलदेवता को अर्पित किया जाता है और फिर स्वयं ग्रहण कर व्रत की अगली प्रक्रिया शुरू होती है। खरना के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ हो जाता है, जिसमें व्रती जल तक ग्रहण नहीं करतीं।

उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ होगा व्रत का समापन

चैती छठ का समापन बुधवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा। इस दौरान व्रती महिलाएं पुनः घाटों पर पहुंचकर सूर्य देव की उपासना करेंगी और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। इसके बाद पारण कर व्रत खोला जाएगा।

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