पटना : बिहार के शिक्षा विभाग में सबकुछ ठीक नहीं है. अभी शिक्षक अभ्यर्थियों का मामला नरम भी नहीं पड़ा था कि एक नया विवाद शुरू हो गया है. जब से शिक्षा विभाग की जिम्मेवारी केके पाठक को दी गयी है तब से यह विभाग और भी चर्चा में आ गया है. कभी विभाग के कर्मचारियों को भेष-भूषा सुधारने का आदेश दिया जाता है, तो कभी राज्य के शिक्षकों को समय पर विद्यालय आने का आदेश जारी हो जाता है. इस बीच, अब विभाग के अपर मुख्य सचिव की कार्यशैली पर शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर नाराज हो गये हैं. उन्होंने इसको लेकर अपर मुख्य सचिव को पित पत्र भेजा है.

केके पाठक होश में रहकर करें काम : भाई वीरेंद्र
तीन पन्नों के इस लेटर में शिक्षा मंत्री ने केके पाठक को जमकर हड़काया है. इस लेटर के जारी होने के बाद केके पाठक के समर्थन और विरोध में जदयू और राजद आमने-सामने आ गई है. जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि केके पाठक अच्छा काम कर रहे हैं. शिक्षा विभाग में उन्होंने काफी सुधार किया है। इस पर राजद ने जवाब दिया.
राजद प्रवक्ता भाई वीरेंद्र ने कहा कि केके पाठक को होश में रहकर काम करना चाहिए. ऐसे अफसरों का कान पकड़कर बाहर निकाल देना चाहिए. भाई वीरेंद्र ने शिक्षा विभाग के अपर सचिव पर कड़ा हमला करते हुए कहा कि नियम के अनुसार शिक्षा मंत्री ने पत्र लिखा है.
मंत्री की सलाह के बिना कोई काम नहीं करना चाहिए. केके पाठक को होश में रहकर काम करना चाहिए। सरकार को बदनाम करने का काम करते हैं. उन्होंने जो किया है अच्छा नहीं किया है। मैं जानता हूं वो क्या चाहते हैं. ऐसे अफसरों का कान पकड़कर बाहर निकालना चाहिए.
जींस टीशर्ट में स्कूल नहीं आयेंगे शिक्षक :
बिहार सरकार ने जून के महीने में कई अधिकारीयों के विभाग बदल दिये थे. इसके बाद शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव की जिम्मेवारी केके पाठक को दी गयी है. पाठक ने कुर्सी संभालते ही राज्य में शिक्षा में बदलाव को लेकर कई आदेश जारी किये. इन्होंने सबसे पहले यह कहा कि बिना बताये बिहार के सरकारी स्कूल के टीचर गायब नहीं होंगे और यदि गायब हुए तो उनका वेतन काट लिया जायेगा. साथ ही हर टीचर को दो बार अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने को कहा गया. शिक्षा विभाग के अधिकारी और कर्मी को यह कहा गया कि कोई भी जींस टीशर्ट में ऑफिस नहीं आयेंगे.
डीएम और जिला शिक्षा अधिकारी एक्शन मोड :
अपर मुख्य सचिव ने इसके अलावा प्रत्येक शनिवार को कार्यालय खुला रखने संबंधी पत्र जारी किया था. इससे शिक्षा अधिकारी को देर शाम तक कार्य करना पड़ रहा है. अब इन्हीं मामलों को लेकर शिक्षा मंत्री के तरफ से इनको पित पत्र भेजा गया है. केके पाठक के आदेश के बाद डीएम और जिला शिक्षा अधिकारी एक्शन मोड में आ गये हैं. पटना जिले में हुए स्कूलों के औचक निरीक्षण के दौरान 77 शिक्षक बिना सूचना के अनुपस्थित पाये गये. इनका वेतन अगले आदेश तक के लिए रोक दिया गया है.
जाने क्या होता है पित पत्र
वैसा पत्र जिसमें सही समाचारों की उपेक्षा करके सनसनी फैलाने वाले समाचार या ध्यान-खींचने वाले शीर्षकों का बहुतायत में प्रयोग किया जाता है. विभागीय आदेशों का पालन नहीं करने. भ्रम की स्थिति बनाने वाली खबरों पर रोक लगाने को लेकर विभागीय स्तर दिशा-निर्देश जारी होते रहते हैं जिसे पित पत्र कहते हैं.

