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Jamshedpur Education: कोऑपरेटिव कॉलेज में कॉन्फोकल लेजर माइक्रोस्कोपी का दिया गया लाइव डेमो, दो दिन की कार्यशाला संपन्न

इस शैक्षणिक पहल में कुल 75 विद्यार्थियों ने भाग लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य एवं अतिथियों ने दीप प्रज्वलन के साथ किया।

by Mujtaba Haider Rizvi
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Jamshedpur : जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज के जूलॉजी विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आइक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में कॉन्फोकल लेजर माइक्रोस्कोपी विषय पर दो दिन की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक पहल में कुल 75 विद्यार्थियों ने भाग लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य एवं अतिथियों ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। अपने संबोधन में प्राचार्य ने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और उन्नत अनुसंधान तकनीकों की व्यावहारिक समझ आज के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

ऐसी कार्यशालाएं न केवल ज्ञान का विस्तार करती हैं, बल्कि शोध और नवाचार की दिशा में प्रेरित भी करती हैं।कार्यशाला में कोलकाता से आए विशेषज्ञ वक्ता डॉ. अनुपम बनर्जी, किरण के. कृष्णन और डॉ. शुआशीष दास ने विद्यार्थियों को कॉन्फोकल लेजर माइक्रोस्कोपी की संरचना, कार्यप्रणाली और उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस तकनीक में लेजर प्रकाश और पिनहोल प्रणाली का उपयोग कर अनावश्यक प्रकाश को हटाया जाता है, जिससे उच्च-रिजॉल्यूशन और स्पष्ट 3D छवियाँ प्राप्त होती हैं। यह तकनीक कोशिकीय संरचना, ऊतक विश्लेषण, फ्लोरोसेंस इमेजिंग और सूक्ष्म जैविक प्रक्रियाओं के अध्ययन में अत्यंत उपयोगी है।आईक्यूएसी की समन्वयक डॉ. नीता सिन्हा सहित डॉ. स्वाति सोरेन, वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विष्णु शंकर सिन्हा, डॉ. संगीता और डॉ. मधुसूदन महतो भी कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे।

सरल उदाहरणों से समझाए गए वैज्ञानिक सिद्धांत

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अमर कुमार ने माइक्रोस्कोपी के वैज्ञानिक सिद्धांतों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए बताया कि कॉन्फोकल माइक्रोस्कोपी पारंपरिक माइक्रोस्कोप की तुलना में बेहतर फोकसिंग और ऑप्टिकल सेक्शनिंग प्रदान करती है। इससे कोशिकाओं के भीतर सूक्ष्म संरचनाओं का सटीक अध्ययन संभव होता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य विद्यार्थियों को उन्नत प्रयोगशालाओं और प्रतिष्ठित शोध संस्थानों से जोड़ना है, ताकि उन्हें शोध गतिविधियों का प्रत्यक्ष अनुभव मिल सके।कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को उपकरण का लाइव डेमो और व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। इससे उनकी वैज्ञानिक समझ और शोध के प्रति रुचि में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

माना जा रहा महत्वपूर्ण शैक्षणिक कदम

झारखंड राज्य में इस तरह की पहल को एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे और सभी ने इसे ज्ञानवर्धक तथा प्रेरणादायक बताया।

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