रांची: सरना धर्म कोड को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत ने प्रेस वार्ता में कहा कि केंद्र सरकार आदिवासियों को धार्मिक पहचान देने से इंकार कर रही है, जो उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पशु और बाघों की गिनती तो करती है, लेकिन आदिवासियों की धार्मिक पहचान को मान्यता देने से पीछे हट रही है। प्रेस वार्ता में सोनाल शांति, कमल ठाकुर, अभिलाष साहू और अन्य नेता भी उपस्थित थे।
अन्य का कॉलम ही गायब
सुखदेव भगत ने कहा कि 2011 की जनगणना में अन्य धर्म कॉलम के अंतर्गत 90 लाख लोगों ने अपने को अलग धर्म बताया था, जिनमें से 50 लाख लोगों ने सरना लिखा था। लेकिन इस बार अन्य का कॉलम हटाकर आदिवासियों के धार्मिक अस्तित्व को मिटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जैन, बौद्ध, सिख जैसे छोटे समुदायों को धार्मिक पहचान मिली है, लेकिन 15 करोड़ आदिवासियों की आस्था को दरकिनार किया जा रहा है।
जनगणना से पहले सरना धर्म कोड
कांग्रेस विधायक दल के उप नेता राजेश कच्छप ने मांग की कि जातिगत जनगणना से पहले आदिवासियों को सरना धर्म कोड दिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सही जनगणना हो तो देश में आदिवासियों की संख्या 15 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह एक सुनियोजित साजिश है। पूर्व विधायक जयप्रकाश गुप्ता ने कहा कि सरना धर्म कोड लागू करने में कोई संवैधानिक बाधा नहीं है, सिर्फ कैबिनेट के फैसले की जरूरत है। लेकिन केंद्र सरकार की मंशा साफ नहीं है।

