मदुरै : केरल के पूर्व मंत्री और सीपीआई (एम) के नए महासचिव एमए बेबी ने पदभार संभालते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मोदी सरकार को जनविरोधी करार देते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अपनी नीतियों के माध्यम से लोगों के खिलाफ काम कर रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि भले ही यह भ्रम हो सकता है कि दुनिया भर में दक्षिणपंथी पार्टियां बढ़ रही हैं, लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं है।

एमए बेबी ने अपनी बात को विस्तार से रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो नीतियां अपना रहे हैं, वह सीधे तौर पर आम जनता के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, ‘मोदी सरकार कॉरपोरेट कंपनियों को रियायतें देने के बजाय, जनता पर भारी टैक्स लगा रही है, जिससे आम आदमी की कमाई पर असर पड़ रहा है। यह जनविरोधी प्रवृत्तियाँ हैं, जो देश के लिए नुकसानदायक हैं’।
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का बयान
इससे पहले, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी सभा को संबोधित करते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और केरल के बीच के रिश्ते मजबूत हैं और दोनों राज्य धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। विजयन ने बताया कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से कई देशों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा है और अब भारत में भी ऐसे ही हालात बन रहे हैं।
विजयन ने कहा, ‘डीएमके सरकार और केरल के बीच का संबंध संघवाद के खिलाफ संघर्ष में एक मॉडल है। यह एक महत्वपूर्ण सम्मेलन है, जो धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए योजना बना रहा है’।
समाजवाद और वामपंथी दलों का समर्थन
एमए बेबी ने यह भी कहा कि पूरी दुनिया में वामपंथी सरकारें तेजी से बढ़ रही हैं और अब वामपंथी पार्टियों द्वारा शासित देशों की संख्या 25 प्रतिशत तक पहुँच गई है। उन्होंने उदाहरण के तौर पर चीन, उत्तरी कोरिया, क्यूबा, लाओस, वियतनाम, नेपाल और श्रीलंका का नाम लिया, जो अब वामपंथी शासन में हैं। बेबी का कहना था कि दक्षिणपंथी और साम्राज्यवाद की नीतियां लोगों के लिए नुकसानदेह साबित हो रही हैं और उनका विकल्प केवल समाजवाद है।
बेबी ने आगे कहा, ‘दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लोग दक्षिणपंथी नीतियों से परेशान हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह समय है जब भारतीय जनता को वामपंथी दलों के पीछे एकजुट होना चाहिए, क्योंकि समाजवादी सरकारें ही जनता के कल्याण को प्राथमिकता देती हैं’।
लाल झंडे के लिए बलिदान
सभा में एमए बेबी ने तमिलनाडु के किल्वेनमनी गांव में 44 लोगों की हत्या की घटना का जिक्र किया, जब वेतन वृद्धि की मांग कर रहे मजदूरों की झोपड़ी में आग लगा दी गई थी। उस वक्त वे सिर्फ 16 साल के थे और केरल में छात्र आंदोलन में शामिल थे। बेबी ने कहा, ‘लाल झंडे के लिए कई शहीदों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। उनका बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। हम इस आंदोलन को शहीदों के आदर्शों को आगे बढ़ाने के रूप में जारी रखेंगे’।

