

नई दिल्ली/Neet Examination Centre: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार यानी 8 जून को नीट-यूजी पेपर लीक मामले पर सुनवाई की। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2024 की शुचिता नष्ट हो गई है और अगर इसके लीक पेपर को सोशल मीडिया के जरिए प्रसारित किया गया है तो दोबारा परीक्षा कराने का आदेश देना होगा।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने यह भी कहा कि अगर पेपर लीक टेलीग्राम, वाट्सएप और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से हो रहा है तो यह ‘जंगल में आग की तरह फैलेगा।’

इसके साथ ही पीठ ने ये भी कहा कि ‘एक बात साफ है कि पेपर लीक हुआ है। अगर परीक्षा की शुचिता नष्ट हो जाती है तो दोबारा परीक्षा का आदेश देना होगा। अगर हम दोषियों की पहचान करने में असमर्थ हैं तो दोबारा परीक्षा का आदेश देना होगा।’

Neet Examination Centre: पेपर कैसे भेजे गए विदेश
वहीं, सुनवाई के दौरान एनटीए और केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि परीक्षा में करीब 24 लाख छात्र शामिल हुए थे। 4750 केंद्रों में परीक्षा का आयोजन हुआ था। इसमें से 15 केंद्र विदेश में थे। इस पर कोर्ट ने पूछा कि पेपर विदेश कैसे भेजे गए तो एनटीए ने बताया कि एंबेसी के जरिए।
इस पर कोर्ट ने पूछा कि किसी अधिकारी के जरिए भेजे गए? शहरों में कैसे भेजे गए? इस पर एनटीए ने कहा कि हम जानकारी करके बताते हैं। फिर कोर्ट ने कहा कि ये बताइए कि पेपर लीक से कितने लोगों को लाभ हुआ? केंद्र ने उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की? कितने लोगों के परिणाम रोके गए हैं? मामला 23 लाख से ज्यादा छात्रों से जुड़ा है, इसलिए यह जरूरी है कि इस पर पूरी जानकारी हमारे पास हो।
कोर्ट ने कहा कि एनटीए हमें बताए कि पेपर लीक की प्रकृति क्या थी? लीक की टाइमलाइन क्या थी? कहां-कहां पेपर लीक हुआ? पेपर पहले कहां लीक हुआ? परीक्षा 5 मई की दोपहर 2 बजे थी, ऐसे में यह स्पष्ट बताएं कि किस वक्त पेपर लीक हुआ? इसके साथ ही कोर्ट ने सीबीआई स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी कहा। 5 मई को हुई नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितता के आरोपों वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 11 जुलाई तय की है।
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