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D. Gukesh : चेस के संसार में डी. गुकेश का चमत्कारी सफर, 18 साल में वर्ल्ड चैंपियन बनकर 20 करोड़ की संपत्ति तक पहुंचे

by Rakesh Pandey
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स्पोर्ट्स डेस्क : चेस की दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाले डी. गुकेश ने महज 18 साल की उम्र में इतिहास रच दिया। विश्वनाथन आनंद के बाद भारत को दूसरा वर्ल्ड चैंपियन मिला और वह भी सबसे कम उम्र में। डी. गुकेश ने 138 साल पुराने चेस (शतरंज) के इतिहास में अपनी जगह बनाते हुए चीन के दिग्गज खिलाड़ी डिंग लिरेन को हराकर वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया।

गुकेश ने यह इतिहास सिंगापुर में आयोजित 17 दिनों तक चली वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप में रचा, जहां उन्होंने 14वीं और आखिरी बाजी में डिंग लिरेन को हराया। 7.5-6.5 से जीत दर्ज कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बेहतरीन चेस ग्रैंडमास्टर्स में से एक हैं।

17 दिनों में 11 करोड़ की ताबड़तोड़ कमाई

गुकेश की इस शानदार जीत के बाद, उनकी नेटवर्थ में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद, गुकेश ने महज 17 दिनों के अंदर 11 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की है। इससे पहले उनकी नेटवर्थ लगभग 8.26 करोड़ रुपये थी, लेकिन अब यह आंकड़ा 20 करोड़ के पार पहुंच चुका है। यह बड़ी बढ़ोतरी मुख्य रूप से उनके द्वारा जीते गए पुरस्कारों और विभिन्न विज्ञापन डील्स के कारण हुई है।

गुकेश को वर्ल्ड चैंपियन बनने पर 11.45 करोड़ रुपये की प्राइज मनी मिली। वहीं, डिंग लिरेन को 9.75 करोड़ रुपये का पुरस्कार मिला। फिडे के नियमों के अनुसार, दोनों खिलाड़ियों को हर मैच जीतने पर 1.69 करोड़ रुपये मिलते हैं और बाकी की राशि दोनों में बराबरी से बांटी जाती है। गुकेश ने तीन मुकाबले जीते—तीसरी, 11वीं और 14वीं बाजी—जिससे उन्हें 5.07 करोड़ रुपये का इनाम मिला।

खिताबी हैट्रिक

2024 के इस साल को गुकेश ने शानदार तरीके से अपने नाम किया। उन्होंने इस साल तीन बड़े खिताब जीते हैं। अप्रैल में, वह वर्ल्ड चैंपियनशिप क्वालिफिकेशन इवेंट और कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में पहुंचे, जहां उन्होंने सबसे ज्यादा 9 अंक हासिल किए और वह इस टूर्नामेंट को जीतने वाले तीसरे सबसे युवा खिलाड़ी बने। 17 साल की उम्र में वह कैंडिडेट्स जीतने वाले दुनिया के सबसे युवा चेस ग्रैंडमास्टर बने।

सितंबर में बुडापेस्ट में आयोजित चेस ओलंपियाड में, गुकेश ने भारतीय टीम का हिस्सा बनकर भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता और व्यक्तिगत गोल्ड मेडल भी अपने नाम किया। अब, दिसंबर में वर्ल्ड चैंपियन बनकर उन्होंने अपने खिताबी सफर को हैट्रिक में बदल दिया।

गुकेश का शतरंज सफर : सात साल की उम्र से शुरुआत

डी. गुकेश का जन्म 29 मई 2006 को चेन्नई (तमिलनाडु) में हुआ था। उनका परिवार काफी प्रेरणादायक है, उनके पिता डॉ. रजनीकांत कान, नाक और गले के सर्जन हैं, जबकि उनकी मां पद्मा एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं। गुकेश ने सात साल की उम्र में चेस खेलना शुरू किया था, और जल्दी ही उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण ने उन्हें इस खेल में सफलता दिलाई।

2015 में, गुकेश ने अंडर-9 एशियन स्कूल चेस चैंपियनशिप जीतकर अपनी पहचान बनाई थी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ। 17 साल की उम्र में कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने के बाद, उन्होंने यह साबित कर दिया कि चेस की दुनिया में उनका भविष्य बेहद चमकदार है।

भविष्य में क्या

गुकेश के लिए चेस का यह सफर अब तक का सबसे शानदार अनुभव रहा है, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। उनका नाम अब विश्व चैंपियन के रूप में लिया जाएगा और उनकी सफलता का यह क्रम आने वाले समय में और भी बड़े मील के पत्थरों तक पहुंचेगा। गुकेश का ध्यान अब अगले टूर्नामेंट्स और चेस की दुनिया के बड़े खिताबों पर होगा। वह उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं जो चेस को अपने कॅरियर के रूप में अपनाना चाहते हैं।

डी. गुकेश ने यह साबित किया कि यदि मेहनत, समर्पण और सही मार्गदर्शन मिले, तो किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। अब उनका नाम चेस के इतिहास में अमर हो चुका है और उनकी प्रेरक यात्रा से आने वाली पीढ़ियां प्रेरणा लेंगी।

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